केंद्र सरकार के 5 बड़े कदम, छोटे किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। भारत में खेती आज भी करोड़ों लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। देश के अधिकतर किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं, जिन्हें खेती के लिए समय पर और सस्ता कर्ज मिलना अक्सर मुश्किल होता है। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने किसानों को संस्थागत ऋण आसानी से उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन उपायों का उद्देश्य किसानों को महंगे साहूकारी कर्ज से बचाना और खेती को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

1.किसान क्रेडिट कार्ड पर सस्ता कर्ज

किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) किसानों को खेती से जुड़े खर्च जैसे बीज, उर्वरक और कीटनाशक खरीदने के लिए सस्ती दर पर ऋण उपलब्ध कराता है। सरकार की संशोधित ब्याज सबवेंशन योजना के तहत KCC पर ब्याज दर 7 प्रतिशत तय की गई है। यदि किसान समय पर ऋण चुका देते हैं, तो उन्हें 3 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट मिलती है, जिससे प्रभावी ब्याज दर केवल 4 प्रतिशत रह जाती है। इसके अलावा KCC की सुविधा अब पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों तक भी बढ़ा दी गई है।

2. बैंकों के लिए कृषि ऋण देना अनिवार्य

रिजर्व बैंक के प्राथमिकता क्षेत्र ऋण नियमों के अनुसार सभी वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और छोटे वित्त बैंक अपने कुल ऋण का कम से कम 18 प्रतिशत कृषि क्षेत्र को देने के लिए बाध्य हैं। इसमें से 10 प्रतिशत हिस्सा खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए निर्धारित किया गया है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में बैंक ऋण मिल सके।

3. प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना

केंद्र सरकार ने बजट 2025-26 में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना का उद्देश्य उन जिलों में कृषि ऋण की उपलब्धता बढ़ाना है जहां अभी तक किसानों को बैंक से पर्याप्त कर्ज नहीं मिल पाता था। इसके तहत अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के कृषि ऋण को बढ़ावा दिया जाएगा।

 4 .बिना गारंटी 2 लाख रुपये तक का कृषि ऋण

1 जनवरी 2025 से गारंटी-मुक्त अल्पकालिक कृषि ऋण की सीमा बढ़ा दी गई है। पहले किसान बिना गारंटी के 1.60 लाख रुपये तक का कर्ज ले सकते थे, जिसे बढ़ाकर अब 2 लाख रुपये कर दिया गया है। इससे किसानों को कर्ज लेने के लिए किसी संपत्ति या गारंटी की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस फैसले का लाभ विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा, जो देश के लगभग 86 प्रतिशत किसानों का हिस्सा हैं।

5. ग्रामीण वित्त को मजबूत बनाने में NABARD की भूमिका

राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि ऋण व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हर जिले के लिए संभावित ऋण योजना तैयार करता है और बैंकों को दिशा-निर्देश देता है। इसके अलावा NABARD क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों और माइक्रोफाइनेंस संस्थानों को वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है, ताकि किसानों की ऋण जरूरतें समय पर पूरी हो सकें।

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