अहम समुद्री रास्ते पर संकट
हाल के हमलों के बाद फारस की खाड़ी का महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावित हो गया है। यह रास्ता दुनिया में कच्चे तेल के परिवहन का सबसे बड़ा मार्ग माना जाता है। भारत को सऊदी अरब और इराक जैसे देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से मिलता है। ऐसे में मार्ग बाधित होने से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर संकट पैदा होने की आशंका बढ़ गई थी।
विशेष छूट के बाद बढ़ी खरीद
स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने भारत को विशेष छूट दी। इस छूट के तहत 5 मार्च से पहले जहाजों पर लादा गया रूसी तेल भारतीय कंपनियां खरीद सकती हैं। जैसे ही यह अनुमति मिली, भारतीय तेल कंपनियों ने तेजी से बाजार में उपलब्ध रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया ताकि भविष्य में किसी भी आपूर्ति संकट से बचा जा सके।
इन कंपनियों ने खरीदा बड़ा भंडार
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश की प्रमुख तेल कंपनियों ने इस खरीद में हिस्सा लिया। सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने लगभग 1 करोड़ बैरल तेल खरीदा है। इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी करीब 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदने का सौदा किया है। बाकी मात्रा अन्य तेल शोधन कंपनियों द्वारा खरीदी गई है।
बदल रहा है तेल की कीमतों का समीकरण
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। पहले रूस अपना तेल कम कीमत पर बेच रहा था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। रूसी तेल की कीमतें अब अंतरराष्ट्रीय मानक कीमत से लगभग 2 से 8 डॉलर प्रति बैरल अधिक तक पहुंच गई हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
जानकारों का मानना है कि रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीदना भारत के लिए एक रणनीतिक कदम है। इससे देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति स्थिर बनी रह सकती है और कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से बचाव हो सकता है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो यह अतिरिक्त तेल भंडार भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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