यूपी सरकार की नई पहल: महिलाओं और किसानों को खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने निराश्रित गोवंश की देखभाल और गो-संरक्षण को मजबूत करने के लिए एक नई योजना शुरू की है। इस पहल के तहत अब गोशालाओं के संचालन में गांव की महिलाओं और किसान उत्पादक संगठनों को भी भागीदारी दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य सिर्फ गोवंश की सुरक्षा करना ही नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी तैयार करना है।

गो-संरक्षण के लिए 2100 करोड़ रुपये का बजट

राज्य सरकार ने गो-संरक्षण से जुड़ी योजनाओं को मजबूत बनाने के लिए 2100 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इस राशि में से लगभग 2000 करोड़ रुपये गोवंश की देखभाल, चारा और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाएंगे। वहीं 100 करोड़ रुपये बड़े गो-संरक्षण केंद्रों के निर्माण पर लगाए जाएंगे। इस कदम को देश में गो-संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

महिलाओं और किसान संगठनों को जिम्मेदारी

अब तक अधिकांश गोशालाओं का संचालन प्रशासन के माध्यम से किया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को इसमें शामिल किया जाएगा। इन समूहों को गोवंश की देखभाल, चारे-पानी की व्यवस्था और गोबर व गोमूत्र से बनने वाले उत्पादों के निर्माण की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके लिए महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे इस काम को बेहतर तरीके से संभाल सकें।

लाखों गोवंश की हो रही देखभाल

प्रदेश में वर्तमान समय में हजारों गोशालाएं संचालित हो रही हैं, जिनमें बड़ी संख्या में निराश्रित गोवंश को सुरक्षित रखा गया है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में और भी बड़े गो-संरक्षण केंद्र स्थापित किए जाएं, जिससे आवारा पशुओं की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सके।

पशुपालकों को आर्थिक सहायता

सरकार पशुपालकों को गायों की देखभाल के लिए आर्थिक सहायता भी दे रही है। चारा और देखभाल के खर्च के लिए प्रतिदिन प्रति गोवंश के हिसाब से राशि सीधे पशुपालकों के बैंक खाते में भेजी जा रही है। यह भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए किया जाता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा

सरकार का लक्ष्य है कि गो-संरक्षण को केवल धार्मिक भावना से जोड़कर न देखा जाए, बल्कि इसे ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भरता से भी जोड़ा जाए। गोबर से जैविक खाद, गोमूत्र से प्राकृतिक कीटनाशक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

आत्मनिर्भर गोशालाओं में कदम

आने वाले समय में हर जिले में ऐसे बड़े गो-संरक्षण केंद्र विकसित करने की योजना है, जो अपनी जरूरतों को खुद पूरा कर सकें। इससे न केवल निराश्रित गोवंश को संरक्षण मिलेगा, बल्कि गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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