महिलाओं पर रहेगा खास फोकस
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। कुल लाभार्थियों में लगभग 75 प्रतिशत महिलाएं और 25 प्रतिशत पुरुष शामिल किए जाएंगे। इसका मकसद महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें सामाजिक-आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
घर-घर तक पहुंचेगी शिक्षा
अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षामित्र, छात्र-छात्राएं और स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मिलकर काम करेंगी। ये सभी मिलकर घर-घर जाकर निरक्षर लोगों की पहचान करेंगे और उन्हें शिक्षा से जोड़ेंगे। इसके लिए एनआईएलपी सर्वे एप के जरिए डेटा जुटाया जाएगा और सितंबर तक सर्वे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बड़ी संख्या में वालंटियर जुड़ेंगे
इस मिशन में समाज के विभिन्न वर्गों को शामिल किया जा रहा है। कक्षा 5 से ऊपर के छात्र, एनएसएस और एनसीसी के सदस्य, बीएड के विद्यार्थी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूह की महिलाएं और सेवानिवृत्त कर्मचारी वालंटियर के रूप में योगदान देंगे। हालांकि, इन वालंटियर को कोई मानदेय नहीं दिया जाएगा, बल्कि यह पूरी तरह सामाजिक योगदान के रूप में किया जाएगा।
प्रशिक्षण और पढ़ाई की व्यवस्था
सभी वालंटियर को एक विशेष पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे प्रभावी तरीके से पढ़ा सकें। प्रत्येक सर्वेयर को 4 से 5 लोगों को साक्षर बनाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। चिन्हित लोगों को लगभग 200 घंटे की कक्षाएं दी जाएंगी, जिसमें रोजाना दो घंटे पढ़ाई कराई जाएगी।
परीक्षा और प्रमाण पत्र
अभियान के अंतर्गत सितंबर और मार्च में साक्षरता परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। जो लोग इन परीक्षाओं में सफल होंगे, उन्हें प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा, जिससे उनकी नई पहचान एक साक्षर नागरिक के रूप में स्थापित हो सके। इस पूरे कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह सक्रिय है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अभियान को गंभीरता से लागू किया जाए और हर स्तर पर इसकी निगरानी सुनिश्चित की जाए।

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