8वें वेतन आयोग पर बढ़ा दबाव: पेंशनभोगियों ने रखीं 10 अहम मांगें

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के सामने 8वें वेतन आयोग को लेकर दबाव अब और तेज हो गया है। 13 अप्रैल 2026 को नेशनल काउंसिल (जेसीएम) ने अपना अंतिम ज्ञापन सौंपते हुए पेंशनभोगियों से जुड़ी कई अहम मांगें रखी हैं। इन मांगों का मकसद बढ़ती महंगाई के बीच रिटायर्ड कर्मचारियों को आर्थिक राहत देना है।

8वें वेतन आयोग पर पेंशनभोगियों की 10 अहम मांगें

समान फिटमेंट फैक्टर: कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक जैसा फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए, जिसे करीब 3.83 रखने का प्रस्ताव है।

पुरानी पेंशन योजना की बहाली: नई पेंशन व्यवस्था को हटाकर फिर से पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की गई है।

नागरिक पेंशनभोगियों के लिए OROP: रक्षा कर्मियों की तरह सिविल पेंशनधारकों को भी ‘एक रैंक, एक पेंशन’ का लाभ दिया जाए।

स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार: सरकारी स्वास्थ्य योजना को 150 नए शहरों तक बढ़ाया जाए और चिकित्सा भत्ता बढ़े।

70 साल से अतिरिक्त पेंशन: 70 वर्ष की आयु के बाद पेंशन में अतिरिक्त बढ़ोतरी (करीब 5%) शुरू की जाए।

न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी: अंतिम वेतन का करीब 67% पेंशन और 50% परिवार पेंशन तय करने की मांग।

कम्यूटेशन अवधि घटाई जाए: पेंशन कम्यूटेशन की रिकवरी अवधि 15 साल से घटाकर 11 साल की जाए।

ग्रेच्युटी सीमा बढ़ाई जाए: अधिकतम ग्रेच्युटी सीमा को 25 लाख से बढ़ाकर 75 लाख रुपये किया जाए।

महंगाई राहत का विलय: जब महंगाई राहत 25% तक पहुंचे, तो उसे मूल पेंशन में जोड़ दिया जाए।

लीव इनकैशमेंट बढ़े: अवकाश नकदीकरण की सीमा 300 दिनों से बढ़ाकर 600 दिन की जाए।

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