इस परियोजना से प्रदेश के 12 प्रमुख जिलों को सीधा लाभ मिलेगा, जिनमें मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज शामिल हैं। इसके अलावा 500 से अधिक गांव इस एक्सप्रेसवे से जुड़ेंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
2021 में हुआ था शिलान्यास, अब पूरा हुआ सपना
गंगा एक्सप्रेसवे की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 दिसंबर 2021 को शाहजहांपुर में रखी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया गया। कम समय में इसका निर्माण पूरा होना प्रदेश की विकास गति को दर्शाता है।
594 किलोमीटर लंबा होगा सफर
गंगा एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 594 किलोमीटर है। यह मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव तक जाएगा। यह मार्ग पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच सीधी और तेज कनेक्टिविटी स्थापित करेगा, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
यूपी बनेगा एक्सप्रेसवे का हब
देश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क के मामले में उत्तर प्रदेश पहले से ही अग्रणी राज्य है। इस नए एक्सप्रेसवे के जुड़ने के बाद राज्य की हिस्सेदारी और बढ़ेगी, जिससे यूपी देश का सबसे मजबूत एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाला राज्य बन जाएगा। यह एक्सप्रेसवे नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा और निवेशकों को आकर्षित करेगा। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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