डीपीआर का काम अंतिम चरण में
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार जून तक डीपीआर तैयार होने की संभावना है। इसके बाद इसे सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी और लक्ष्य है कि इसी साल निर्माण कार्य की शुरुआत हो जाए।
बढ़ते ट्रैफिक ने बढ़ाई जरूरत
लखनऊ से सीतापुर तक लगभग 100 किलोमीटर लंबे इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। रोजाना 38 हजार से अधिक वाहन इस मार्ग का उपयोग करते हैं, जिसके कारण कई स्थानों पर जाम की स्थिति आम हो चुकी है। इटौंजा टोल से आगे निकलते ही अक्सर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ जाती है, जिससे यात्रियों को समय की परेशानी का सामना करना पड़ता है।
बिना जमीन अधिग्रहण के विस्तार
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए किसानों से अतिरिक्त जमीन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। NHAI ने पहले ही सर्वे के जरिए उपलब्ध भूमि का आकलन कर लिया है। मौजूदा सड़क के किनारे उपलब्ध जगह का उपयोग कर ही इसे छह लेन में बदला जाएगा, जिससे जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की लंबी प्रक्रिया से भी बचा जा सकेगा।
भविष्य में और सुगम होगा सफर
छह लेन बनने के बाद इस मार्ग पर यातायात न सिर्फ तेज होगा बल्कि लंबे समय तक ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि यह सड़क आने वाले कई दशकों तक बढ़ते ट्रैफिक को संभालने में सक्षम होगी।

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