भारत का बड़ा कदम, अमेरिका को झटका, चीन खुश!

नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार और कूटनीतिक समीकरणों के बीच भारत ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। कई साल बाद भारत ने ईरान से कच्चे तेल की खरीद दोबारा शुरू की है, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा भुगतान के तरीके को लेकर हो रही है।

सात साल बाद फिर शुरू हुई खरीद

भारत ने करीब सात साल के अंतराल के बाद ईरान से तेल आयात किया है। देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन ने लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा, जिसकी कीमत करीब 20 करोड़ डॉलर यानी लगभग 1800 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इसके अलावा निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ी खेपों को भी भारत आने की अनुमति मिली है, जिससे साफ है कि इस अवसर का फायदा अलग-अलग स्तर पर उठाया गया।

डॉलर की जगह युआन में भुगतान

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस सौदे की सबसे खास बात यह रही कि भुगतान अमेरिकी डॉलर में नहीं, बल्कि चीन की मुद्रा युआन में किया गया। यह भुगतान एक निजी बैंक की शंघाई शाखा के जरिए पूरा किया गया। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय तेल व्यापार डॉलर में होता है, लेकिन ईरान पर लगे प्रतिबंधों के चलते यह संभव नहीं था। ऐसे में वैकल्पिक मुद्रा का इस्तेमाल किया गया।

भुगतान की शर्तें भी अलग रहीं

रिपोर्ट के मुताबिक इस बार भुगतान का तरीका भी सामान्य से अलग रहा। तेल पहुंचने से पहले ही लगभग 95 प्रतिशत रकम चुका दी गई, जबकि आमतौर पर भुगतान डिलीवरी के बाद होता है। जानकारों के अनुसार, प्रतिबंधों वाले देशों के साथ इस तरह के सौदों में ऐसी शर्तें देखी जाती हैं।

फिलहाल संकेत हैं कि यह खरीद स्थायी रूप से शुरू नहीं की गई है। साल 2019 के बाद भारत ने ईरान से तेल लेना बंद कर दिया था और अभी भी यह कदम एक सीमित अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, युआन में भुगतान से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार में डॉलर के विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।

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