एथेनॉल को पूरक ईंधन बनाने की तैयारी
उद्योग जगत की ओर से सरकार को एक प्रस्ताव दिया गया है, जिसमें करीब 1,000 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल को खाना पकाने में इस्तेमाल करने का सुझाव रखा गया है। हालांकि इसे एलपीजी का सीधा विकल्प नहीं, बल्कि एक पूरक स्वच्छ ईंधन के रूप में देखा जा रहा है। सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है और जल्द ही इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट मंत्रालयों की समिति को सौंपी जा सकती है।
कहां होगा सबसे ज्यादा उपयोग?
विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल का इस्तेमाल सबसे पहले बड़े स्तर पर खाना बनाने वाले स्थानों पर किया जा सकता है, जैसे होटल, रेस्टोरेंट, हवाई अड्डों के किचन। इससे घरेलू एलपीजी की खपत पर दबाव कम होगा और आम उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
एलपीजी संकट की वजह
हाल के समय में वैश्विक तनाव, खासकर पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका असर भारत में एलपीजी की उपलब्धता पर भी पड़ा। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने घरेलू उपयोग को प्राथमिकता दी और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए आपूर्ति सीमित कर दी। इसके चलते गैस सिलेंडर की मांग अचानक बढ़ गई।
एथेनॉल क्यों है समाधान?
एथेनॉल एक नवीकरणीय जैव ईंधन है, जिसे गन्ना, मक्का और टूटे चावल से तैयार किया जाता है। अभी इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से पेट्रोल में मिलाने के लिए किया जाता है, जिससे तेल आयात और प्रदूषण कम करने में मदद मिलती है। अगर इसे खाना पकाने में इस्तेमाल किया जाता है, तो इससे आयातित ईंधन पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
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