अब ऑनलाइन होगी शुरुआत
नई व्यवस्था के अनुसार 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को सबसे पहले ई-निबंधन पोर्टल पर आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान उन्हें अपनी उम्र और जरूरी विवरण दर्ज करना होगा। जैसे ही निर्धारित शुल्क और जानकारी भरी जाती है, सिस्टम उन्हें आगे की प्रक्रिया के विकल्प उपलब्ध करा देता है। इसके बाद आवेदक को जमीन रजिस्ट्री से संबंधित विकल्प चुनना होता है, जिसके आधार पर तारीख और समय स्वतः तय हो जाता है।
घर पहुंचेगी रजिस्ट्री टीम
इस सुविधा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि तय समय पर रजिस्ट्री विभाग की टीम स्वयं बुजुर्ग के घर पहुंचती है। वहीं पर दस्तावेजों का सत्यापन, हस्ताक्षर और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। इससे पूरी प्रक्रिया आसान और सम्मानजनक बनती है।
पहले क्या थी परेशानी?
इससे पहले बुजुर्गों को रजिस्ट्री के लिए मेडिकल प्रमाण पत्र के साथ आवेदन करना पड़ता था। कई बार उन्हें बार-बार कार्यालय जाना पड़ता था, जिससे शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी होती थी। साथ ही दस्तावेजी प्रक्रिया भी काफी जटिल और समय लेने वाली थी।
नई व्यवस्था के प्रमुख फायदे
इस डिजिटल पहल से कई स्तरों पर सुधार देखने को मिलेगा:
बुजुर्गों को दफ्तर जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े पर नियंत्रण लगेगा।
समय और खर्च दोनों की बचत होगी।
दस्तावेज सुरक्षित डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेंगे।

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