बिहार ने रचा इतिहास! गरीबी घटाने में देश में बना नंबर-1

पटना। बिहार अब विकास के नए आंकड़ों के साथ अपनी पुरानी छवि बदलता नजर आ रहा है। राज्य सरकार के योजना एवं विकास विभाग के मुताबिक पिछले दो दशकों में बिहार ने गरीबी कम करने, मानव विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक स्थिति के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आंकड़े बताते हैं कि राज्य ने कई महत्वपूर्ण सूचकांकों में राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है।

गरीबी कम करने में बिहार की बड़ी उपलब्धि

नीति आयोग के बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के अनुसार बिहार ने गरीबी घटाने की रफ्तार में देश में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में जगह बनाई है। साल 2015-16 में बिहार की बहुआयामी गरीबी दर 51.89 प्रतिशत थी, जो 2019-21 तक घटकर 33.76 प्रतिशत रह गई।

यानी करीब चार वर्षों में गरीबी दर में 18.13 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज की गई। इसी अवधि में देशभर में गरीबी में औसत कमी करीब 9.89 प्रतिशत अंक रही। यह आंकड़ा बताता है कि बिहार में गरीबी कम होने की गति राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक रही।

मानव विकास में भी आया बड़ा बदलाव

मानव विकास सूचकांक (HDI) में भी बिहार ने सुधार दर्ज किया है। साल 2006 में राज्य का HDI स्कोर 0.485 था, जो 2023 में बढ़कर 0.614 हो गया। इस दौरान करीब 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर वृद्धि लगभग 23 प्रतिशत रही। स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा के विस्तार और जीवन स्तर में सुधार को इस बदलाव की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

20 साल में 13 गुना बढ़ी प्रति व्यक्ति आय

बिहार की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा परिवर्तन आया है। साल 2004 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय 5,780 रुपये थी, जो 2024-25 में बढ़कर 76,490 रुपये तक पहुंच गई। यानी करीब 20 वर्षों में प्रति व्यक्ति आय में लगभग 13 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था में बढ़ती गतिविधियों का संकेत मिलता है।

विकास योजनाओं पर खर्च में भारी बढ़ोतरी

राज्य सरकार ने बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया है। साल 2005-06 में प्रति व्यक्ति विकास खर्च 1,463 रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर 13,279 रुपये हो गया। इसी दौरान स्वास्थ्य क्षेत्र के खर्च में करीब 14.8 गुना और शिक्षा क्षेत्र के खर्च में लगभग 13.2 गुना वृद्धि हुई है।

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