इस प्रक्रिया के तहत शिक्षकों को एक 'डेटा कैप्चर फॉर्मेट (DCF)' भरना अनिवार्य किया गया है, जिसे निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन अपडेट करना होगा। विभाग ने इसके लिए 28 जून तक की अंतिम तिथि तय की है। यह नियम केवल किसी एक श्रेणी तक सीमित नहीं है। राज्य के सभी प्रकार के शिक्षक चाहे वे नियोजित हों, नियमित हों, बीपीएससी से चयनित नए शिक्षक हों, प्रधान शिक्षक हों या अन्य किसी पद पर कार्यरत हों। सभी पर यह व्यवस्था समान रूप से लागू होगी।
59 बिंदुओं पर देनी होगी पूरी जानकारी
डिजिटल सेवा रिकॉर्ड तैयार करने के लिए शिक्षकों से कुल 59 प्रकार की सूचनाएं मांगी गई हैं। इनमें व्यक्तिगत विवरण से लेकर सेवा संबंधी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं। शिक्षकों को अपने स्थायी और वर्तमान पते की पूरी जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही दोनों स्थानों के आवासीय प्रमाणपत्र की कॉपी भी अपलोड करनी होगी। इतना ही नहीं, पहली नियुक्ति के समय का आवासीय प्रमाणपत्र भी अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा।
इसके अलावा सेवा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जैसे कि पहली नियुक्ति की तिथि, नियुक्ति प्राधिकारी का विवरण, अब तक हुए सभी ट्रांसफर और पोस्टिंग, विभिन्न स्कूलों में योगदान की तिथियां। इन सभी विवरणों को डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा।
सेवा से जुड़े सभी रिकॉर्ड भी जरूरी
नए निर्देशों के अनुसार शिक्षकों को अपनी सेवा अवधि से जुड़ी वित्तीय जानकारी भी साझा करनी होगी। इसमें शामिल है नियुक्ति पत्र संख्या, जॉइनिंग डेट, प्रारंभिक वेतन, वर्तमान मूल वेतन, यूएएन (UAN) नंबर, वेतन भुगतान का पूरा रिकॉर्ड। नियोजित शिक्षकों के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं।
पंचायती राज और नगर प्रारंभिक शिक्षक नियमावली के तहत नियुक्त शिक्षकों को अपनी नियुक्ति तिथि 1 जुलाई 2006 के रूप में दर्ज करनी होगी। वहीं, बीपीएससी से चयनित या नियमित शिक्षकों को अपने वेतनमान, पे मैट्रिक्स लेवल और अन्य भत्तों जैसे एचआरए की जानकारी भी अपडेट करनी होगी।
डिजिटल सिस्टम से कामकाज होगा आसान
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य शिक्षकों की सेवा से जुड़ी जानकारी को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित करना है। इससे भविष्य में प्रमोशन, ट्रांसफर और रिटायरमेंट जैसी प्रक्रियाएं काफी आसान हो जाएंगी और शिक्षकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
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