सरकार का कहना है कि अब खरीद प्रक्रिया को अधिक लचीला बनाया जाएगा, ताकि बाजार की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके। इससे न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।
किसानों की उम्मीदें और असंतोष
हालांकि सरकार के इस फैसले का स्वागत तो हो रहा है, लेकिन महाराष्ट्र जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों के किसान पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। किसानों का कहना है कि वर्तमान बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। उनका तर्क है कि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा। महाराष्ट्र के किसानों की मांग है कि प्याज की न्यूनतम खरीद दर कम से कम 3,000 रुपये प्रति क्विंटल होनी चाहिए।
बफर स्टॉक नीति में बदलाव
सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए प्याज के बफर स्टॉक का लक्ष्य 2 लाख टन निर्धारित किया है। यह पिछले वर्ष के 3 लाख टन के मुकाबले कम है। बफर स्टॉक का उपयोग सरकार बाजार में हस्तक्षेप कर कीमतों को नियंत्रित करने के लिए करती है, खासकर जब कीमतें अत्यधिक बढ़ जाती हैं या गिर जाती हैं।
उत्पादन लगभग स्थिर
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में 2025-26 में प्याज उत्पादन लगभग 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग समान है। उत्पादन में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं दिख रही है, जिससे बाजार में स्थिरता की उम्मीद की जा रही है।

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