आइए जानते हैं रिटायर कर्मचारियों की 5 प्रमुख मांगें क्या हैं।
1. न्यूनतम पेंशन में बढ़ोतरी की मांग
पेंशनर्स की सबसे बड़ी मांग न्यूनतम पेंशन बढ़ाने को लेकर है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पेंशन की गणना आखिरी वेतन के आधार पर अधिक बेहतर तरीके से की जानी चाहिए। उनकी मांग है कि न्यूनतम पेंशन को आखिरी वेतन या औसत वेतन के करीब 67 प्रतिशत तक तय किया जाए, जिससे रिटायर कर्मचारियों को महंगाई के दौर में ज्यादा आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
2. उम्र बढ़ने के साथ पेंशन में अतिरिक्त लाभ
पेंशनभोगी संगठनों का कहना है कि 60 वर्ष के बाद स्वास्थ्य और जीवन-यापन से जुड़े खर्च लगातार बढ़ते हैं। इसलिए उम्र के हिसाब से पेंशन में अतिरिक्त बढ़ोतरी की व्यवस्था होनी चाहिए। प्रस्ताव में 65 साल के बाद पेंशन बढ़ाने, 70, 75 और 80 वर्ष की उम्र पर अतिरिक्त लाभ देने जैसी मांगें शामिल हैं। उनका तर्क है कि बुजुर्ग पेंशनर्स को बढ़ती जरूरतों के हिसाब से अधिक सहायता मिलनी चाहिए।
3. कर्मचारियों के लिए भी ‘वन रैंक, वन पेंशन’
कई पेंशनर्स संगठनों की मांग है कि अलग-अलग समय पर रिटायर हुए कर्मचारियों के बीच पेंशन में जो अंतर है, उसे खत्म किया जाए। उनका कहना है कि समान पद और समान सेवा अवधि वाले कर्मचारियों को समान पेंशन मिलनी चाहिए। इसी आधार पर नागरिक कर्मचारियों के लिए भी वन रैंक, वन पेंशन जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई जा रही है।
4. पेंशन कम्यूटेशन अवधि घटाने की मांग
रिटायरमेंट के समय कर्मचारी अपनी पेंशन के एक हिस्से को एकमुश्त राशि के रूप में ले सकते हैं। इसके बदले कुछ समय तक उनकी मासिक पेंशन कम रहती है। मौजूदा व्यवस्था में इसकी बहाली अवधि 15 साल है। पेंशनर्स संगठनों की मांग है कि इस अवधि को घटाकर 10 से 12 साल किया जाए, ताकि बुजुर्ग कर्मचारियों को पूरी पेंशन का लाभ जल्द मिल सके।
5. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
पुरानी पेंशन योजना को वापस लागू करने की मांग लंबे समय से चल रही है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पुरानी पेंशन व्यवस्था रिटायर कर्मचारियों को ज्यादा निश्चित आर्थिक सुरक्षा देती थी। उनका तर्क है कि नई पेंशन व्यवस्था बाजार से जुड़ी होने के कारण इसमें अनिश्चितता रहती है, जबकि OPS में भविष्य की आय को लेकर अधिक भरोसा रहता है।

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