न्यूनतम वेतन में हो सकती है रिकॉर्ड बढ़ोतरी
वर्तमान में केंद्र सरकार के कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये प्रति माह है, जिसे 7वें वेतन आयोग के तहत तय किया गया था। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा 2.57 से बढ़ाकर 3.0 से 4.0 के बीच किया जाए। यदि सरकार 2.86 या उससे अधिक का फिटमेंट फैक्टर लागू करती है, तो न्यूनतम वेतन 46,000 से 51,480 रुपये तक पहुंच सकता है।
पेंशनर्स को मिल सकती है बड़ी राहत
8वें वेतन आयोग से पेंशनभोगियों को भी काफी उम्मीदें हैं। वर्तमान में न्यूनतम पेंशन 9,000 रुपये है। पेंशनर्स संगठनों का सुझाव है कि पेंशन को अंतिम वेतन के करीब 67 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए। यदि इस दिशा में फैसला होता है तो लाखों पेंशनर्स की मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। साथ ही अधिक उम्र के पेंशनभोगियों के लिए अतिरिक्त लाभ की भी मांग की जा रही है।
फिटमेंट फैक्टर पर टिकी हैं सभी की निगाहें
वेतन वृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण आधार फिटमेंट फैक्टर माना जाता है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 रखा गया था। अब कई कर्मचारी संगठन इसे 3.5 या 3.83 तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो सभी पे-लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
महंगाई भत्ते की गणना में बदलाव संभव
महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। 8वें वेतन आयोग में इनके लिए नया आधार वर्ष तय किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इससे महंगाई की वास्तविक स्थिति के अनुसार भत्तों की गणना हो सकेगी और कर्मचारियों को अधिक राहत मिल सकती है।
हर साल वेतन समीक्षा की मांग
कर्मचारी संगठनों का मानना है कि हर 10 साल में वेतन आयोग का गठन पर्याप्त नहीं है। तेजी से बढ़ती महंगाई को देखते हुए वे हर साल वेतन समीक्षा की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। इससे कर्मचारियों की आय और बाजार की परिस्थितियों के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकेगा।
वार्षिक इंक्रीमेंट बढ़ाने की भी उठी मांग
मौजूदा व्यवस्था के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को हर साल 3 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि मिलती है। रेलवे समेत कई कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है। यदि यह मांग स्वीकार होती है तो कर्मचारियों की आय में दीर्घकालिक रूप से बड़ा फायदा हो सकता है।
भत्तों और सुविधाओं में सुधार की उम्मीद
बढ़ती जीवन-यापन लागत को देखते हुए हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रैवल अलाउंस (TA) और मेडिकल सुविधाओं में सुधार की मांग भी जोर पकड़ रही है। महानगरों और बड़े शहरों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए यह बदलाव विशेष रूप से राहत देने वाला साबित हो सकता है।
OPS, NPS और UPS पर हो सकता है बड़ा फैसला
पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर कर्मचारियों की मांग लगातार बनी हुई है। वर्तमान में अधिकांश केंद्रीय कर्मचारी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत आते हैं, जबकि सरकार यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) भी लेकर आई है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि भविष्य में कर्मचारियों को विभिन्न पेंशन विकल्पों में से चयन करने का अवसर मिल सकता है।

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