पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था से बढ़ी पारदर्शिता
योजना को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने इसे पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से जोड़ दिया है। आवेदन से लेकर लाभ वितरण तक की प्रक्रिया ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से की जाती है। इसके साथ ही PFMS (Public Financial Management System) और DBT (Direct Benefit Transfer) सिस्टम के जरिए सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है।
6 चरणों में मिलता है कुल 25,000 रुपये का लाभ
इस योजना के तहत बालिकाओं को उनके जीवन के अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता दी जाती है। कुल मिलाकर 25,000 रुपये की सहायता छह किस्तों में प्रदान की जाती है:
जन्म पर ₹5,000
1 वर्ष की उम्र तक टीकाकरण पूरा होने पर ₹2,000
कक्षा 1 में प्रवेश पर ₹3,000
कक्षा 6 में प्रवेश पर ₹3,000
कक्षा 9 में प्रवेश पर ₹5,000
कक्षा 10/12 पास करने के बाद उच्च शिक्षा (डिग्री/डिप्लोमा) में प्रवेश पर ₹7,000
इस प्रकार यह योजना बेटियों की पढ़ाई और विकास के हर महत्वपूर्ण चरण में आर्थिक सहारा देती है।
लाखों परिवारों को मिला भरोसा और सहारा
योजना का बढ़ता दायरा इस बात का संकेत है कि यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं बल्कि लाखों परिवारों के लिए भरोसे का माध्यम बन चुकी है। समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता ने शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई है और बालिकाओं के स्कूल छोड़ने की दर में कमी लाने में भी मदद की है।

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