सरकार का उद्देश्य है कि गांव स्तर पर लोगों की भागीदारी बढ़ाकर सड़क हादसों को कम किया जा सके। इसके लिए ग्राम प्रधानों को 'सड़क सुरक्षा अग्रदूत' के रूप में काम करने की जिम्मेदारी दी गई है। ग्राम प्रधानों के माध्यम से यह अभियान गांवों तक आसानी से पहुंच सकता है और लोगों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ सकती है।
सड़क हादसों को रोकने में प्रधान निभाएंगे अहम भूमिका
परिवहन विभाग के अनुसार, प्रदेश में होने वाले सड़क हादसों में बड़ी संख्या लापरवाही और यातायात नियमों की अनदेखी के कारण होती है। ऐसे में गांवों में जागरूकता फैलाने के लिए प्रधानों की भूमिका को महत्वपूर्ण माना गया है। ग्राम प्रधान अपने क्षेत्र के लोगों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और सुरक्षित वाहन चलाने के लिए प्रेरित करेंगे। विभाग का मानना है कि गांव के लोग अपने प्रधान की बात को अधिक गंभीरता से लेते हैं, इसलिए यह अभियान ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
अच्छा काम करने वाले प्रधान होंगे सम्मानित
यदि किसी ग्राम पंचायत में प्रधान की पहल से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आती है और लोग यातायात नियमों का पालन करने लगते हैं, तो ऐसे प्रधानों को जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। उन्हें सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बेहतर योगदान के लिए विशेष पहचान दी जाएगी।
गांव-गांव पहुंचेगा सड़क सुरक्षा का संदेश
इस अभियान के तहत ग्राम प्रधानों से कहा गया है कि वे लोगों को जागरूक करें कि:
दोपहिया वाहन चलाते समय हमेशा हेलमेट पहनें।
चार पहिया वाहन में सीट बेल्ट का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से करें।
बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों को नियमों की जानकारी देकर जागरूक करें।
ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग केवल कृषि कार्यों और सामान ढोने के लिए किया जाए।
सभी लोग यातायात नियमों का पालन कर अपनी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
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