विभिन्न विभाग करेंगे कार्यान्वयन
इस अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य के कई विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगरीय विकास विभाग, महिला कल्याण विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, समाज कल्याण विभाग तथा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन मिलकर महिलाओं की पहचान, चयन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे।
रोजगारपरक ट्रेडों में मिलेगा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत महिलाओं की रुचि और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के कोर्स संचालित किए जाएंगे। ब्यूटी एवं वेलनेस सेक्टर में ब्यूटीशियन, हेयर स्टाइलिंग, मेकअप आर्टिस्ट और स्पा थेरेपी जैसे पाठ्यक्रम शामिल होंगे। इसके अलावा सिलाई, कटिंग, टेलरिंग, बुटीक प्रबंधन और फैशन डिजाइनिंग जैसे कोर्स भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
डिजिटल और कंप्यूटर कौशल पर विशेष जोर
आज के डिजिटल युग में तकनीकी ज्ञान की बढ़ती मांग को देखते हुए इंटरमीडिएट पास महिलाओं के लिए कंप्यूटर आधारित प्रशिक्षण भी शुरू किया जाएगा। इसमें बेसिक कंप्यूटर, डेटा एंट्री, वेब डिजाइनिंग और डिजिटल मार्केटिंग जैसे पाठ्यक्रम शामिल रहेंगे।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी महिलाओं को मिलेंगे अवसर
स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ती जरूरतों को देखते हुए महिलाओं को ड्यूटी असिस्टेंट (नर्सिंग), होम हेल्थ केयर और लैब टेक्नीशियन जैसे कोर्स भी कराए जाएंगे। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार पाने के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।
पारंपरिक कला और लघु उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार कढ़ाई, जूट उत्पाद निर्माण, खिलौना निर्माण और खाद्य प्रसंस्करण (बेकिंग एवं कुकिंग) जैसे पारंपरिक और लघु उद्योग आधारित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराएगी। इससे महिलाओं को घर बैठे स्वरोजगार शुरू करने में सहायता मिलेगी। साथ ही फ्रंट ऑफिस मैनेजमेंट और रिटेल सेल्स जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी प्रशिक्षण देकर उन्हें निजी क्षेत्र की नौकरियों के लिए तैयार किया जाएगा।
महिलाओं के लिए 3 से 12 महीने तक चलेगा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि कोर्स के अनुसार तीन महीने से लेकर बारह महीने तक निर्धारित की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क होगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाएं भी इसका लाभ उठा सकेंगी।

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