बिहार सरकार के 3 बड़े फैसले: सभी 38 जिलों में लागू

पटना। बिहार सरकार ने जमीन की मापी (भूमि सर्वे) से जुड़ी सेवाओं में बड़ा बदलाव करते हुए नई शुल्क दरें लागू कर दी हैं। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा लिए गए इस फैसले के बाद राज्य के सभी 38 जिलों में रैयती जमीन की मापी अब पहले से महंगी हो गई है। इस बदलाव का सीधा असर किसानों, भू-स्वामियों और जमीन से जुड़े मामलों पर पड़ेगा।

1 .ग्रामीण क्षेत्रों में नई मापी दर

नई व्यवस्था के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में अब रैयती जमीन की मापी के लिए प्रति खेसरा ₹1000 शुल्क देना होगा। हालांकि, एक आवेदन पर अधिकतम ₹4000 तक ही शुल्क लिया जाएगा। इसका मतलब है कि बड़े भू-भाग की मापी कराने पर भी शुल्क सीमा तय रहेगी।

2 .शहरी क्षेत्रों में ज्यादा शुल्क

नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में जमीन की मापी के लिए शुल्क और अधिक रखा गया है। प्रति खेसरा शुल्क ₹2000, जबकि अधिकतम सीमा ₹8000 लिया जायेगा। इससे साफ है कि शहरी क्षेत्रों में मापी का खर्च ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक होगा।

3 .तत्काल मापी सेवा भी महंगी

सरकार ने त्वरित (तत्काल) मापी सेवा के लिए भी अलग दरें निर्धारित की हैं। ग्रामीण क्षेत्र में ₹2000 प्रति खेसरा, जबकि अधिकतम ₹8000, वहीं, शहरी क्षेत्र में ₹4000 प्रति खेसरा, जबकि अधिकतम ₹16000 लिया जायेगा। इस सेवा का लाभ वे लोग ले सकते हैं जिन्हें जल्दी मापी की आवश्यकता होती है।

नियमों के तहत ऑनलाइन प्रक्रिया जारी

विभाग के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया बिहार काश्तकारी नियमावली 1885 के नियम-23 के तहत संचालित की जा रही है। भूमि मापी के लिए आवेदन ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाते हैं और अंचल कार्यालयों द्वारा प्रक्रिया पूरी की जाती है।

बिहार में जमीन मापी का क्यों बढ़ाया गया शुल्क?

सरकार का कहना है कि लंबे समय से मापी शुल्क में कोई संशोधन नहीं किया गया था। बढ़ती तकनीकी लागत और प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए यह बदलाव जरूरी हो गया था। इसका उद्देश्य मापी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना बताया जा रहा है।

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