बच्चों के नामांकन पर रहेगा खास ध्यान
सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से दूर न रहे। इसके लिए स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने की योजना बनाई गई है। नए सत्र में शत-प्रतिशत नामांकन को प्राथमिकता दी जाएगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा बच्चे स्कूल पहुंच सकें।
स्कूलों में बढ़ेंगी बुनियादी सुविधाएं
स्कूल खुलने से पहले विद्यालयों की सुविधाओं की जांच की जाएगी। इसमें मुख्य रूप से स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, बिजली की उपलब्धता, साफ-सुथरे शौचालय, स्कूल परिसर की सफाई, सुरक्षित पढ़ाई का माहौल जैसी सुविधाओं को बेहतर किया जाएगा। इसके अलावा छात्राओं के लिए सुरक्षित शौचालय और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आसान पहुंच वाली सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जर्जर भवनों की होगी जांच
सरकार ने ऐसे स्कूल भवनों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं जो पुराने या कमजोर हालत में हैं। अगर कोई भवन बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं पाया जाता है तो वहां वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।
पढ़ाई के स्तर होंगे बेहतर
सरकार चाहती है कि बच्चे सिर्फ किताबें याद करने तक सीमित न रहें, बल्कि उनमें समझने, पढ़ने और लिखने की क्षमता भी विकसित हो। इसके लिए स्कूलों में पुस्तकालयों का उपयोग बढ़ाने, पढ़ने की आदत विकसित करने, रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
निपुण भारत मिशन को गति
छोटे बच्चों की शुरुआती शिक्षा को मजबूत करने के लिए निपुण भारत मिशन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों में शुरुआती कक्षाओं से ही पढ़ने, लिखने और गणित की बुनियादी समझ विकसित करना है। सरकार प्रारंभिक शिक्षा यानी 3 से 6 साल के बच्चों के लिए चल रहे बालवाटिका और ECCE कार्यक्रमों को भी मजबूत करने की तैयारी में है।
बच्चों के पोषण पर भी फोकस
स्कूलों में चल रही पीएम पोषण योजना को और प्रभावी बनाने की योजना है। इसके तहत कई विद्यालयों में किचन गार्डन विकसित किए जाएंगे, जहां स्थानीय सब्जियां उगाई जाएंगी। इससे बच्चों को पौष्टिक भोजन के साथ-साथ प्रकृति और खेती से जुड़ी जानकारी भी मिलेगी।
शिक्षकों से जुड़े मामलों का भी होगा समाधान
सरकार ने शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े लंबित मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश दिए हैं। इसमें वेतन संबंधी मामलों, पदोन्नति और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया को भी तेज करने की तैयारी है, ताकि नए सत्र में स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता बेहतर बनी रहे।
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