सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2024 तक इस योजना के तहत 7.72 करोड़ किसानों को 10.05 लाख करोड़ रुपये का लोन दिया जा चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना किसानों के लिए सबसे प्रभावी और भरोसेमंद साधनों में से एक मानी जाती है।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) क्या है?
किसान क्रेडिट कार्ड योजना की शुरुआत 1998 में की गई थी। इसका मकसद था कि किसान अपनी खेती के लिए बीज, उर्वरक और कीटनाशकों जैसी जरूरतों के लिए आसान लोन प्राप्त कर सकें। 2004 में इस योजना का दायरा बढ़ाया गया और इसे डेयरी, मत्स्य पालन, पशुपालन और कृषि निवेश जैसी गतिविधियों के लिए भी लागू कर दिया गया। KCC एक तरह का बैंक कार्ड होता है, जिससे किसान सीधे लोन निकाल सकते हैं या कृषि सामग्री खरीद सकते हैं। यह सुविधा सरकारी और निजी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और सहकारी बैंकों के माध्यम से उपलब्ध है।
किसान क्रेडिट कार्ड के प्रमुख लाभ
तुरंत लोन की सुविधा: किसान अपनी जरूरत के अनुसार कभी भी लोन निकाल सकते हैं।
डिजिटल लेन-देन: ATM, PoS मशीन या मोबाइल बैंकिंग के जरिए लेन-देन करना आसान होता है।
बीमा सुरक्षा: कार्डधारकों को फसल बीमा, स्वास्थ्य बीमा और दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाएँ भी मिलती हैं।
लोन की राशि: किसान क्रेडिट कार्ड के तहत अधिकतम 5 लाख रुपये तक का शॉर्ट-टर्म लोन उपलब्ध है।
लोन की फ्लेक्सिबल सीमा: लोन की राशि किसान की जमीन, फसल और निवेश के आधार पर तय होती है।
सस्ती ब्याज दर: इस योजना के तहत किसानों को 7% वार्षिक ब्याज दर पर लोन मिलता है। समय पर चुकाने पर 3% तक ब्याज सब्सिडी भी मिलती है।
कौन उठा सकता है KCC का लाभ?
व्यक्तिगत किसान या संयुक्त रूप से खेती करने वाले किसान, बटाईदार, किरायेदार या मौखिक पट्टे पर खेती करने वाले किसान, सेल्फ हेल्प ग्रुप (SHG) और ज्वाइंट लायबिलिटी ग्रुप (JLG) के सदस्य, डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन जैसी कृषि से जुड़ी गतिविधियों में लगे किसान।
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