राजस्व अधिशेष में यूपी नंबर वन
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की नवीनतम रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि वित्त वर्ष 2022-23 में देश के 16 राज्यों ने राजस्व अधिशेष हासिल किया। इनमें उत्तर प्रदेश शीर्ष पर रहा है। यानी राज्य की आमदनी उसके कुल खर्च से अधिक रही। योगी सरकार ने 37,000 करोड़ रुपये का अधिशेष दर्ज करते हुए वित्तीय अनुशासन की मजबूत मिसाल पेश की है।
कर सुधारों से बदली तस्वीर
यह उपलब्धि किसी एक साल का नतीजा नहीं, बल्कि सात वर्षों की लगातार सुधार प्रक्रिया का परिणाम है। जीएसटी (GST) प्रणाली के कुशल कार्यान्वयन, कर चोरी पर रोक और राजस्व पारदर्शिता ने यूपी की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया है। 2012-13 में जहां राज्य को करों से केवल 54,000 करोड़ रुपये की आमदनी होती थी, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 2,25,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई यानी लगभग चार गुना वृद्धि।
आर्थिक वृद्धि में दोगुनी रफ्तार
राज्य की सकल आय भी इसी अवधि में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। 2017-18 में 13.6 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में यह करीब 29.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। अगले वित्त वर्ष में इसके 35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में योगी सरकार के कार्यकाल में यह वृद्धि दर लगभग दोगुनी रही है, जिससे स्पष्ट है कि “योगी मॉडल” ने प्रदेश की आर्थिक गति को नई दिशा दी है।
वित्तीय अनुशासन और जिम्मेदार खर्च
योगी सरकार ने विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच अद्भुत संतुलन बनाया है। राज्य के कुल बजट का केवल 42 प्रतिशत हिस्सा वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान में जाता है, जबकि कई विकसित राज्यों में यह 50 प्रतिशत से अधिक है। सब्सिडी का हिस्सा भी मात्र 4.4 प्रतिशत है, जिससे यह सिद्ध होता है कि यूपी ने अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखकर पूंजीगत निवेश को प्राथमिकता दी है।
पूंजीगत व्यय में देश में सबसे आगे
उत्तर प्रदेश आज देश का वह राज्य है जो अपने कुल खर्च का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च करता है। यह देश में सबसे अधिक है। 2022-23 में राज्य का पूंजीगत व्यय 1.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो बुनियादी ढांचे, सड़कों, एक्सप्रेसवे और औद्योगिक विकास की नई पहचान बन चुका है।
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