हर महीने सर्वे
राज्य कर विभाग की टीम ईंट भट्ठा स्थलों के साथ-साथ कारोबारियों के दफ्तरों में भी पहुंचकर जांच करेगी। अधिकारियों द्वारा यह देखा जाएगा कि भट्ठे पर कितनी ईंटें पकाई गईं, कितनी बेची गईं और उस पर जीएसटी का भुगतान कितना हुआ। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कई कारोबारी वास्तविक बिक्री से कम आंकड़े दिखाकर टैक्स चोरी कर रहे हैं।
एसओपी हुई जारी
विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी जारी की है, जिसमें सर्वे का तरीका, रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश और कार्रवाई की प्रक्रिया तय की गई है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी स्तर पर जीएसटी चोरी न हो सके।
राज्य में 22 हजार से अधिक ईंट भट्ठे
प्रदेश में करीब 22,000 ईंट भट्ठे संचालित हैं। इन सभी से 12 प्रतिशत जीएसटी वसूला जाता है। विभाग के अनुसार, बड़ी संख्या में भट्ठा संचालक समय पर कर अदा नहीं कर रहे हैं। हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह बात सामने आई कि इस सेक्टर से जीएसटी की वसूली अपेक्षाकृत कम है।
गलत जानकारी देने वालों पर कार्रवाई
अगर सर्वे के दौरान यह पाया गया कि किसी ईंट भट्ठा मालिक ने बिक्री या उत्पादन से संबंधित गलत जानकारी दी है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माना, कर की वसूली और भविष्य के लाइसेंस नवीनीकरण में अड़चन जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है।
क्या है उद्देश्य? टैक्स प्रणाली में पारदर्शिता
राज्य कर विभाग का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि टैक्स प्रणाली को पारदर्शी बनाना है। सही जानकारी देने वाले कारोबारियों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी, जबकि नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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