लगातार बढ़ोतरी की परंपरा
योगी सरकार के कार्यकाल में गन्ना मूल्य में निरंतर सुधार देखने को मिला है। वर्ष 2017 से अब तक राज्य सरकार ने किसानों के हित में कई बार दरें बढ़ाई हैं। यदि पिछली सरकारों के आंकड़ों से तुलना करें, तो 2007 से 2017 तक जहाँ कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान हुआ था, वहीं 2017 से अब तक 2.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। यह सरकार की किसानों के प्रति संवेदनशील नीति को दर्शाता है।
राजनीतिक रणनीति भी वजह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम भी है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले पंचायत चुनावों को देखते हुए सरकार किसानों के बीच सकारात्मक माहौल बनाने में जुटी है। गन्ना मूल्य वृद्धि ग्रामीण वोट बैंक को साधने में एक अहम भूमिका निभा सकती है।
हरियाणा से तुलना और दबाव
हाल ही में हरियाणा सरकार ने भी गन्ना मूल्य में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी। हरियाणा में पहले से ही गन्ने का मूल्य यूपी से अधिक रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के किसान लंबे समय से मूल्य वृद्धि की मांग कर रहे थे। किसानों के बढ़ते दबाव और पड़ोसी राज्य की पहल को देखते हुए यूपी सरकार ने यह कदम उठाया।
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