कौन संभालेगा आयोग की कमान
सरकार ने इस आयोग की अध्यक्षता का जिम्मा सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई को सौंपा है। उनके साथ आईआईएम बैंगलोर के प्रोफेसर पुलक घोष अंशकालिक सदस्य के रूप में और पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन सदस्य-सचिव के रूप में शामिल होंगे। यह आयोग एक अस्थायी निकाय होगा और गठन की तारीख से 18 महीनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। यानी 2026 की शुरुआत से पहले ही यह तय हो जाएगा कि नई सैलरी संरचना कैसी होगी।
कब से लागू होंगी सिफारिशें
आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। इसका मतलब है कि अगले डेढ़ साल के भीतर कर्मचारियों की आय में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। यह कदम न केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आएगा, बल्कि पेंशनरों की आय में भी बढ़ोतरी सुनिश्चित करेगा।
क्या है ‘फिटमेंट फैक्टर’ का खेल
हर वेतन आयोग में कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय करने में एक अहम भूमिका निभाता है ‘फिटमेंट फैक्टर’। सरल भाषा में कहें तो यह वह संख्या होती है जिससे मौजूदा बेसिक पे को गुणा करके नया वेतन निकाला जाता है। उदाहरण के लिए, 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था। इसी कारण उस समय न्यूनतम वेतन ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 प्रति माह कर दिया गया था। अब चर्चा इस बात की है कि 8वें वेतन आयोग में यह फैक्टर कितना रखा जाएगा। यदि इसे बढ़ाया जाता है तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ी छलांग देखने को मिल सकती है।
महंगाई भत्ता और वास्तविक वृद्धि
7वें वेतन आयोग के लागू होते समय महंगाई भत्ते (DA) को रीसेट किया गया था, यानी उसे शून्य से शुरू किया गया। उस समय वास्तविक वृद्धि लगभग 14.3% रही थी, लेकिन अन्य भत्तों को जोड़ने पर कुल वेतन में करीब 23% की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी। अब उम्मीद की जा रही है कि 8वें वेतन आयोग में भी कर्मचारियों को इसी तरह का या उससे अधिक लाभ मिल सकता है।
कर्मचारियों और पेंशनरों की उम्मीदें
केंद्रीय कर्मचारी लंबे समय से वेतन संशोधन की मांग कर रहे थे। बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए 8वें वेतन आयोग से उम्मीदें काफी ऊंची हैं। इस आयोग की सिफारिशें न केवल वर्तमान कर्मचारियों बल्कि रिटायर हो चुके पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेंगी।

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