50 लाख कर्मचारियों और 50 लाख पेंशनरों को लाभ
इस फैसले से देशभर के लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और लगभग 50 लाख पेंशनभोगी सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। आयोग को गठन की तिथि से 18 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। उम्मीद की जा रही है कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू की जा सकती हैं।
आयोग की संरचना: तीन सदस्यीय अस्थायी निकाय
8वां वेतन आयोग एक अस्थायी निकाय (Temporary Body) होगा, जिसमें तीन प्रमुख सदस्य होंगे। यह आयोग आवश्यकता पड़ने पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट भी प्रस्तुत कर सकेगा, ताकि महत्वपूर्ण मुद्दों पर समय रहते निर्णय लिए जा सकें।
अध्यक्ष (Chairperson) -सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई
सदस्य (Part-time Member) -आईआईएम बैंगलोर के प्रोफेसर पुलक घोष
सदस्य-सचिव (Member Secretary) – पंकज जैन, सचिव, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय
सिफारिशें तैयार करते समय किन बिंदुओं पर रहेगा फोकस
8वां वेतन आयोग केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की समग्र आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित ढांचा तैयार करेगा। इसके लिए आयोग निम्न बिंदुओं पर विशेष रूप से विचार करेगा।
1 .देश की आर्थिक स्थिति और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता।
2 .यह सुनिश्चित करना कि विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हों।
3 .गैर-योगदान आधारित पेंशन योजनाओं (Non-contributory Pension Schemes) की Unfunded Cost को ध्यान में रखना।
4 .आयोग की सिफारिशों का राज्य सरकारों के वित्तीय ढांचे पर संभावित असर, क्योंकि राज्य अक्सर केंद्र की सिफारिशों को संशोधित रूप में अपनाते हैं।
5 .केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSUs) और निजी क्षेत्र (Private Sector) के कर्मचारियों की वेतन संरचना, सुविधाएँ और कार्य परिस्थितियों की तुलना।

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