यह दिशा-निर्देश 27 अक्टूबर 2025 को जारी ऑफिस मेमोरेंडम (O.M. No. 1/1(33)/2024-P&PW(K)/9629) के तहत आए हैं। इसमें Central Civil Services (Pension) Rules, 2021 के नियमों को दोहराया गया है। ताकि कर्मचारियों को इसकी जानकारी मिल सके।
दो पत्नियों की स्थिति में पेंशन का वितरण
DoPPW ने स्पष्ट किया कि 'विधवा' या 'विधुर' का मतलब केवल कानूनी रूप से विवाहिता जीवनसाथी से है। यदि किसी मृत कर्मचारी की एक से अधिक विधवाएं हैं, तो फैमिली पेंशन समान हिस्सों में वितरित होगी। अगर किसी विधवा की मृत्यु हो जाती है या वह पात्र नहीं रहती, तो उसका हिस्सा पात्र बच्चों को मिलेगा।
दूसरी शादी अवैध मानी गई
विभाग ने यह भी कहा कि यदि कोई कर्मचारी पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी करता है, तो यह Hindu Marriage Act, 1955 और CCS (Pension) Rules, 2021 का उल्लंघन होगा। ऐसे मामलों में विभागों को निर्णय लेने में सावधानी और कानूनी समझदारी दिखाने की आवश्यकता है।
कानूनी सलाह जरूरी
दो पत्नियों से जुड़े पेंशन मामलों में Department of Legal Affairs से राय लेना अनिवार्य है। संबंधित मंत्रालय या विभाग के पेंशन अधिकारी को भी इन मामलों की जानकारी देनी होगी ताकि सभी विभागों में नियमों का एकसमान पालन सुनिश्चित हो।
फैमिली पेंशन का प्राथमिकता क्रम
सबसे पहले विधवा/विधुर, उसके बाद पात्र बच्चे (गोद लिए हुए, सौतेले और रिटायरमेंट के बाद जन्मे बच्चे शामिल), फिर आश्रित माता-पिता, अंत में मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम आश्रित भाई-बहन।
रिटायरमेंट के बाद मृत्यु पर बढ़ी पेंशन
DoPPW ने बताया कि यदि कोई कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद मरता है, तो उसके परिवार को Enhanced Rate पर फैमिली पेंशन मिलेगी। यह पेंशन 7 साल तक या कर्मचारी की 67 वर्ष की आयु तक जारी रहेगी, जो भी पहले हो। यह नियम सभी कर्मचारियों पर लागू होगा, चाहे वे किसी भी उम्र में रिटायर हुए हों। इस कदम से फैमिली पेंशन नियमों में स्पष्टता आई है और परिवारों के लिए वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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