किन जिलों में रहेगा असर?
मौसम विभाग के अनुसार, प्रयागराज, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली और भदोही जैसे जिलों में तूफान का सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिलेगा। इन इलाकों में तेज हवा चलने के साथ बिजली गिरने और भारी वर्षा की संभावना है।
मंगलवार को ही कई जिलों में इस बदलाव के संकेत मिलने लगे थे। सोनभद्र में सबसे अधिक 65 मिमी बारिश दर्ज की गई, झांसी में 51 मिमी, और उरई में करीब 48.2 मिमी बारिश हुई। यह स्पष्ट है कि मोंथा का असर धीरे-धीरे प्रदेश के दक्षिणी इलाकों में पहुंच चुका है।
कैसे बना चक्रवात मोंथा?
आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, 28 अक्तूबर की सुबह तक यह सिस्टम गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया था। यह बंगाल की खाड़ी से आगे बढ़ते हुए उत्तर की ओर सक्रिय हुआ और अब इसका असर उत्तर प्रदेश तक दिखाई देने लगा है। चक्रवात के गुजरने के बाद, मौसम विभाग का अनुमान है कि 1 नवंबर से दिन का तापमान दोबारा बढ़ना शुरू हो जाएगा और मौसम सामान्य होने लगेगा।
किसानों के लिए बढ़ी परेशानी
बारिश की यह नई खेप किसानों के लिए राहत से ज्यादा परेशानी लेकर आई है। इस समय प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में धान की फसल कटाई के चरण में है, कहीं कटकर खेतों में पड़ी है, तो कहीं कटाई बाकी है। ऐसे में लगातार बारिश से फसल के भीगने, सड़ने या खराब होने का खतरा बढ़ गया है। किसानों को चिंता है कि अगर मौसम अगले कुछ दिनों तक इसी तरह खराब रहा, तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर असर पड़ेगा।

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