ऑपरेशन “एपिक फ्यूरी” से बढ़ा तनाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अभियान फरवरी के अंत में शुरू हुआ था, जिसमें अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद से पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका ने अपने हवाई और नौसैनिक संसाधनों को भी इलाके में सक्रिय कर दिया है।
क्या है B-1B लांसर बॉम्बर?
B-1B लांसर, जिसे “Bone” के नाम से भी जाना जाता है, अमेरिकी वायुसेना का एक लंबी दूरी का सुपरसोनिक बॉम्बर है। यह 1985 से सेवा में है और शुरुआत में परमाणु हमलों के लिए डिजाइन किया गया था। बाद में इसे पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल के लिए अपग्रेड किया गया। आज यह विमान अत्याधुनिक गाइडेड बम, क्रूज मिसाइल और अन्य सटीक हथियारों से लैस है, जिससे यह दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और भारी हमला करने में सक्षम है।
कितनी खतरनाक है बॉम्बर
B-1B लांसर को दुनिया के सबसे शक्तिशाली बॉम्बर्स में गिना जाता है। यह लगभग 34,000 किलोग्राम (75,000 पाउंड) तक हथियार ले जा सकता है। इसकी अधिकतम गति मैक 1.2 तक जाती है। स्विंग-विंग तकनीक के कारण यह अलग-अलग परिस्थितियों में तेजी से उड़ान भर सकता है। हवा में रीफ्यूलिंग की क्षमता इसे लंबी दूरी तक लगातार मिशन करने में सक्षम बनाती है
पहले भी हो चुका है इस्तेमाल
इस बॉम्बर का उपयोग पहले अफगानिस्तान, इराक और सीरिया जैसे संघर्ष क्षेत्रों में किया जा चुका है, जहां इसने बड़े पैमाने पर हवाई हमलों में अहम भूमिका निभाई थी।
चीन की नजर क्यों?
मिडिल ईस्ट में इस तरह की तैनाती पर चीन की भी नजर बनी हुई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का भी हिस्सा बनता जा रहा है। ऐसे में बड़े देशों की गतिविधियों पर करीबी निगरानी रखी जा रही है।

0 comments:
Post a Comment