यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली, 1956 में संशोधन करते हुए नए प्रावधान जोड़े हैं, जिससे कर्मचारियों के आर्थिक लेन-देन पर अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
निवेश की जानकारी देना होगा अनिवार्य
नए नियम के अनुसार यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष के दौरान अपने छह माह के मूल वेतन से अधिक राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेश माध्यमों में लगाता है, तो उसे इसकी जानकारी संबंधित प्राधिकारी को देना अनिवार्य होगा। पहले नियमों में इस तरह के निवेश की सूचना देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था।
चल संपत्ति के लेन-देन का नया नियम
सरकार ने चल संपत्ति से जुड़े लेन-देन के नियमों में भी बदलाव किया है। अब यदि कोई कर्मचारी दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति का लेन-देन करता है, तो उसे तुरंत इसकी सूचना देनी होगी। इससे पहले यह सीमा एक महीने के मूल वेतन के बराबर थी।
हर साल देना होगा अचल संपत्ति का विवरण
संशोधित नियमों के तहत अब सभी सरकारी कर्मचारियों को अपनी अचल संपत्ति का विवरण हर वर्ष देना होगा। कर्मचारियों को पहली नियुक्ति के समय अपनी संपत्तियों की घोषणा करनी होगी और इसके बाद हर साल उसका अपडेट देना पड़ेगा। पहले यह जानकारी हर पांच वर्ष में देना अनिवार्य था।
परिवार के नाम की संपत्ति भी बतानी होगी
नए प्रावधानों के अनुसार कर्मचारियों को केवल अपनी ही नहीं बल्कि अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्ति की जानकारी भी देनी होगी। इसमें खरीदी गई, दान में मिली, पट्टे पर ली गई या रेहन रखी गई संपत्तियों के साथ-साथ अन्य निवेशों का पूरा विवरण शामिल होगा।
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