निवेश से जुड़ी जानकारी देना होगा जरूरी
नए प्रस्ताव के अनुसार यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने छह माह के मूल वेतन से अधिक राशि शेयर, स्टॉक या किसी अन्य निवेश माध्यम में लगाता है, तो उसे इसकी जानकारी अपने विभाग या संबंधित प्राधिकारी को देना अनिवार्य होगा। अभी तक इस तरह के निवेश की सूचना देने का कोई स्पष्ट नियम नहीं था। इस बदलाव का उद्देश्य कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ाना है।
चल संपत्ति के लेन-देन के नियम में बदलाव
सरकार चल संपत्ति से जुड़े लेन-देन के नियमों में भी संशोधन करने जा रही है। नए प्रावधान के अनुसार यदि कोई कर्मचारी दो माह के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति की खरीद-फरोख्त करता है, तो उसे तुरंत इसकी सूचना देनी होगी। पहले यह सीमा एक माह के मूल वेतन से अधिक थी। इससे सरकार को कर्मचारियों की बड़ी वित्तीय गतिविधियों की जानकारी समय पर मिल सकेगी।
हर साल देना होगा अचल संपत्ति का विवरण
नियमों में एक और बड़ा बदलाव अचल संपत्ति से संबंधित है। अब सभी सरकारी कर्मचारियों को अपनी अचल संपत्तियों की जानकारी हर वर्ष देनी होगी। वर्तमान व्यवस्था में यह घोषणा हर पांच साल में की जाती है। हालांकि व्यवहार में सरकार हर साल जानकारी लेती रही है, लेकिन अब इसे नियम का हिस्सा बनाया जाएगा। कर्मचारियों को अपनी या अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों जैसे खरीदी गई जमीन, दान में मिली संपत्ति, पट्टे पर ली गई जमीन या गिरवी रखी गई संपत्तियों का पूरा विवरण देना होगा।

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