सरकार का कहना है कि जमीन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड को सही और व्यवस्थित बनाने के लिए यह सर्वे जरूरी है। इससे भविष्य में जमीन से जुड़े विवाद कम करने में भी मदद मिल सकती है।
सर्वे की प्रगति पर होगी अहम बैठक
भूमि सर्वे के काम की स्थिति को समझने के लिए 13 मार्च को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक पटना के शास्त्रीनगर स्थित राजस्व सर्वे प्रशिक्षण संस्थान में दोपहर 2 बजे होगी। बैठक की अध्यक्षता खुद विजय कुमार सिन्हा करेंगे। इस दौरान राज्य के सभी जिलों से जुड़े अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में चल रहे सर्वे कार्य की जानकारी देंगे। सरकार यह भी देखेगी कि किन जिलों में काम तेज गति से हो रहा है और कहां रफ्तार धीमी है।
धीमी रफ्तार वाले जिलों पर नजर
बैठक में जमीन सर्वे से जुड़े काम की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। जिन जिलों में सर्वे का काम अपेक्षित गति से नहीं चल रहा है, वहां के अधिकारियों से जवाब भी मांगा जा सकता है। सरकार चाहती है कि आने वाले समय में इस अभियान को तेज गति से आगे बढ़ाया जाए।
किसानों ने उठाई कई शिकायतें
भूमि सर्वे के दौरान कई किसानों ने जमीन से जुड़े कागजों में गड़बड़ी की शिकायत भी की है। कुछ लोगों का कहना है कि जमीन का क्षेत्रफल सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया है, जबकि कई जगह लगान की रसीद में जरूरी जानकारी नहीं मिलती। इन कारणों से कई गांवों में जमीन को लेकर विवाद की स्थिति भी पैदा हो गई है। कई परिवारों में जमीन के बंटवारे और कब्जे को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
सरकार के सामने चुनौती
राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जमीन सर्वे को समय पर पूरा किया जाए और साथ ही रिकॉर्ड की गलतियों को भी ठीक किया जाए। अगर यह प्रक्रिया सही तरीके से पूरी हो जाती है तो भविष्य में जमीन से जुड़े विवाद काफी हद तक कम हो सकते हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार की नई समयसीमा और लगातार हो रही समीक्षा बैठकों के बाद बिहार में भूमि सर्वे अभियान किस गति से आगे बढ़ता है।
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