पटना में आयोजित गन्ना प्रौद्योगिकी संगोष्ठी में बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अब खेती को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक को अपनाना बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने बताया कि यदि किसान नई तकनीकों का इस्तेमाल करेंगे तो गन्ना उत्पादन और खेती की गुणवत्ता दोनों में बड़ा सुधार हो सकता है।
तकनीक से खेती को मिलेगा नया आयाम
सरकार का मानना है कि खेती में आधुनिक तकनीक अपनाने से किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी और लागत भी कम होगी। इसी दिशा में राज्य सरकार ने पिछले बजट में कृषि से जुड़ी नई तकनीकों के विकास के लिए “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” स्थापित करने का प्रावधान किया है। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को नई तकनीक, बेहतर बीज और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू
उपमुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पहले बिहार में उद्योग स्थापित करना कठिन माना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार के दौरान राज्य में करीब 9 से 10 बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू किया जा चुका है। इससे न केवल गन्ना किसानों को फायदा मिला है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ा है।
2025 के चुनाव में किया गया था वादा
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अगले पांच वर्षों में बिहार में 25 नई चीनी मिलें शुरू करने का वादा किया था। नई सरकार बनने के बाद इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया गया है और इसे जल्द ही धरातल पर उतारने की कोशिश की जा रही है।
चीनी उद्योग के लिए नई प्रोत्साहन नीति
राज्य सरकार 2026 के लिए एक नई प्रोत्साहन नीति भी तैयार कर रही है, जिसका उद्देश्य चीनी उद्योग को बढ़ावा देना है। इससे गन्ना की खेती को प्रोत्साहन मिलेगा, किसानों की आय बढ़ेगी और राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
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