इस संबंध में बिहार लोकभवन की ओर से एक ड्राफ्ट जारी किया गया है। प्रस्ताव के मुताबिक राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली एसएलईटी परीक्षा का स्वरूप काफी हद तक यूजीसी नेट की तरह होगा। इस परीक्षा के जरिए उम्मीदवारों की विषय संबंधी समझ और शैक्षणिक योग्यता का आकलन किया जाएगा।
पात्रता परीक्षा के बाद ही बहाली प्रक्रिया
नए प्रस्तावित नियमों के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए अभ्यर्थियों को पहले नेट या एसएलईटी जैसी पात्रता परीक्षा पास करनी होगी। इसके बाद ही वे बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से विश्वविद्यालयों में योग्य और योग्यतम शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित होगी तथा चयन प्रक्रिया में एक समान मानक स्थापित हो सकेगा।
पीएचडी धारकों को मिल सकती है छूट
ड्राफ्ट में कुछ विशेष मामलों में छूट का प्रावधान भी रखा गया है। जिन अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषय में यूजीसी के नियमों के अनुरूप पीएचडी की डिग्री होगी, उन्हें नेट या एसएलईटी से छूट दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए पीएचडी नियमित मोड में पूरी की गई होनी चाहिए और शोध प्रबंध का मूल्यांकन कम से कम दो बाहरी विशेषज्ञों द्वारा किया गया होना जरूरी है।
कुछ विषयों में अनिवार्यता नहीं
मसौदे में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन विषयों में यूजीसी द्वारा नेट या एसएलईटी आयोजित नहीं किया जाता, उन विषयों के लिए यह अनिवार्यता लागू नहीं होगी। इसके अलावा विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से पीएचडी करने वाले अभ्यर्थियों को भी कुछ मामलों में पात्र माना जा सकता है।
योग्यता से जुड़े नए मानदंड
एसएलईटी परीक्षा में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर डिग्री होना आवश्यक होगा। साथ ही स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर उसी विषय का अध्ययन होना चाहिए। नए नियमों के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया में अनुभव के लिए अलग से अंक देने का प्रावधान नहीं रखा गया है। पीएचडी को केवल पात्रता के रूप में माना जा सकता है, ठीक उसी तरह जैसे नेट परीक्षा को माना जाता है।
कुछ विषयों के लिए अलग शर्तें
ड्राफ्ट स्टैच्यूट 2025 में कुछ विषयों के लिए विशेष पात्रता मानदंड भी तय किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर हिंदी विषय में सहायक प्राध्यापक बनने के लिए भाषा विज्ञान, तुलनात्मक साहित्य, अनुवाद अध्ययन या लोक साहित्य जैसे विषयों में स्नातकोत्तर डिग्री मान्य हो सकती है, लेकिन इसके लिए स्नातक स्तर पर हिंदी भाषा और साहित्य मुख्य विषय होना अनिवार्य रहेगा।
इसी प्रकार दर्शनशास्त्र विषय में बौद्ध दर्शन, जैन दर्शन, तुलनात्मक धर्म अध्ययन और योग दर्शन जैसे विषयों में स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाले उम्मीदवार भी पात्र होंगे, बशर्ते उन्होंने स्नातक स्तर पर दर्शनशास्त्र को मुख्य विषय के रूप में पढ़ा हो।

0 comments:
Post a Comment