रूस के साथ हुआ बड़ा रक्षा समझौता
भारतीय रक्षा मंत्रालय ने रूस की कंपनी जेएससी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ लगभग 2,182 करोड़ रुपये (करीब 236 मिलियन डॉलर) का अनुबंध किया है। इस समझौते में वर्टिकल लॉन्च श्टिल मिसाइलों के साथ-साथ उनसे जुड़े मिसाइल होल्डिंग फ्रेम की खरीद भी शामिल है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस मिसाइल सिस्टम का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करना है।
क्या है Shtil-1 मिसाइल सिस्टम
Shtil-1 रूस द्वारा विकसित एक मीडियम-रेंज, शिप-बेस्ड सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है। यह विशेष रूप से युद्धपोतों की रक्षा के लिए तैयार की गई है। इस सिस्टम में 9M317ME मिसाइल का इस्तेमाल किया जाता है, जो सेमी-एक्टिव रडार होमिंग तकनीक पर काम करती है। इस मिसाइल प्रणाली को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह समुद्र में तैनात जहाजों को हेलीकॉप्टर, फाइटर जेट, एंटी-शिप क्रूज मिसाइल और ड्रोन जैसे खतरों से बचा सके।
एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला
Shtil-1 मिसाइल सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक साथ कई लक्ष्यों पर नजर रखकर हमला कर सकता है। बताया जाता है कि यह प्रणाली एक समय में 12 अलग-अलग टारगेट को निशाना बनाने में सक्षम है। इससे युद्ध की स्थिति में जहाजों की सुरक्षा और भी मजबूत हो जाती है।
हिंद महासागर में रणनीतिक महत्व
भारत के लिए हिंद महासागर क्षेत्र बेहद रणनीतिक महत्व रखता है। इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियां और पाकिस्तान की सैन्य साझेदारी को देखते हुए भारत अपनी नौसेना को लगातार मजबूत बना रहा है। जानकारों का मानना है कि Shtil-1 मिसाइल सिस्टम के शामिल होने से भारतीय युद्धपोतों की सुरक्षा क्षमता बढ़ेगी और समुद्री क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी।
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