तकनीकी कारणों से अटकी परियोजनाएं
जानकारी के अनुसार इन परियोजनाओं को तकनीकी आधार पर फिलहाल मंजूरी नहीं दी गई है। अब संबंधित विभाग को इन योजनाओं का प्रस्ताव दोबारा तैयार करके भेजना होगा। प्रस्ताव में आवश्यक संशोधन करने और नई दरें तय करने में कुछ महीनों का समय लग सकता है, जिसके कारण इन परियोजनाओं के शुरू होने में और विलंब हो सकता है।
पीपीपीएसी की बैठक में हुआ फैसला
हाल ही में आर्थिक मामलों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समिति की बैठक में इन परियोजनाओं पर चर्चा की गई थी। इस बैठक में उत्तर प्रदेश की एक सड़क परियोजना को मंजूरी मिल गई, लेकिन बिहार से जुड़ी तीन योजनाओं को स्वीकृति नहीं दी गई। समिति का मानना था कि इन परियोजनाओं में कुछ तकनीकी खामियां हैं और इन्हें नियमों के अनुरूप फिर से तैयार कर प्रस्तुत करने की जरूरत है।
नई शर्तों के कारण बढ़ी चुनौती
केंद्र सरकार के सड़क निर्माण से जुड़े नियमों में हाल के समय में कुछ बदलाव किए गए हैं। अब सड़क परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले उनके संचालन और रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) की लागत को भी प्रस्ताव में शामिल करना जरूरी किया गया है। बताया जा रहा है कि बिहार की इन परियोजनाओं में यह व्यवस्था पूरी तरह शामिल नहीं थी, जिसके कारण उन्हें वापस भेज दिया गया।
कौन-कौन सी परियोजनाएं प्रभावित
जिन योजनाओं को फिलहाल मंजूरी नहीं मिली है, उनमें राज्य की तीन महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें सबसे प्रमुख पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे है, जिसकी लंबाई लगभग 244 किलोमीटर प्रस्तावित है और इसे चार लेन सड़क के रूप में बनाया जाना है। दूसरी परियोजना अनीसाबाद-दीदारगंज एलिवेटेड रोड है, जो पटना में बनने वाली छह लेन की सड़क होगी। इसकी लंबाई करीब 17 किलोमीटर प्रस्तावित है और इसका निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग 22 और 31 के हिस्से में किया जाना है।
तीसरी परियोजना वाराणसी-रांची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के एक हिस्से से संबंधित है, जिसकी लंबाई बिहार में लगभग 41 किलोमीटर होगी। यह मार्ग कैमूर और रोहतास जिलों से होकर गुजरने की योजना है और इसे छह लेन सड़क के रूप में विकसित किया जाना है।
हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल पर होना था निर्माण
इन तीनों परियोजनाओं का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत किया जाना प्रस्तावित था। इस मॉडल में निर्माण एजेंसी को कुल लागत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा खुद निवेश करना होता है, जबकि बाकी 40 प्रतिशत राशि सरकार की ओर से दी जाती है। बाद में एजेंसी टोल के माध्यम से अपनी लागत की भरपाई करती है।
विकास की रफ्तार पर पड़ सकता है असर
ये तीनों परियोजनाएं बिहार के सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही थीं। इनके निर्माण से राज्य के कई जिलों के बीच आवागमन तेज और सुगम होने की उम्मीद थी। हालांकि अब प्रस्ताव दोबारा तैयार करने की प्रक्रिया के कारण इन योजनाओं के शुरू होने में कुछ समय और लग सकता है।
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