करीब 5.97 लाख शिक्षकों को मिलेगा लाभ
राज्य के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत लगभग 5.97 लाख शिक्षक इस नई व्यवस्था से लाभान्वित होंगे। इस संबंध में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव की ओर से सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश भेजे गए हैं। पत्र में कहा गया है कि शिक्षकों को समय पर वेतन देने के लिए पूरी प्रक्रिया को तय समयसीमा के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा।
उपस्थिति के आधार पर होगी वेतन प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत हर महीने 20 से 25 तारीख के बीच शिक्षकों की उपस्थिति का विवरण जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय को भेजना जरूरी होगा। इसी जानकारी के आधार पर वेतन भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वेतन भुगतान से पहले शिक्षकों की उपस्थिति से संबंधित सभी आंकड़े सही तरीके से दर्ज हों और भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो।
26 तारीख तक भेजा जाएगा प्रस्ताव
विभागीय निर्देशों के अनुसार जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) द्वारा 26 तारीख तक वेतन भुगतान से जुड़ा प्रस्ताव कोषागार पदाधिकारी को भेज दिया जाएगा। इसके बाद कोषागार विभाग के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करते हुए 30 तारीख तक शिक्षकों के बैंक खातों में वेतन राशि भेजने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि अगले महीने की शुरुआत में शिक्षकों को उनका वेतन मिल सके।
अनुपस्थिति का विवरण देना अनिवार्य
नई व्यवस्था में शिक्षकों की अनुपस्थिति से संबंधित जानकारी भी समय पर उपलब्ध कराना जरूरी होगा। यदि किसी विद्यालय या अधिकारी की ओर से यह विवरण तय समय पर नहीं भेजा जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर तय की जाएगी।
शिक्षकों को मिलेगी बड़ी राहत
शिक्षा विभाग का कहना है कि इस नई व्यवस्था से वेतन भुगतान की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगी। इससे राज्य के प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को हर महीने समय पर वेतन मिल सकेगा। लंबे समय से वेतन में होने वाली देरी से शिक्षकों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद उम्मीद है कि यह समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी और शिक्षकों को समय पर वेतन मिल सकेगा।
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