सरकार ने एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955 के प्रावधानों को लागू करते हुए रिफाइनरियों को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के उत्पादन को बढ़ाने का निर्देश दिया है। इस कदम का उद्देश्य देश में जरूरी ऊर्जा संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और किसी भी तरह की कमी या कालाबाजारी को रोकना है।
क्या है एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955
एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट, 1955 एक महत्वपूर्ण कानून है जिसे सरकार ने आम नागरिकों को जरूरी वस्तुएं उचित कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए बनाया था। इस कानून के तहत सरकार आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और व्यापार को नियंत्रित कर सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य जमाखोरी, कृत्रिम कमी और ब्लैक मार्केटिंग को रोकना है, ताकि आम लोगों को आवश्यक सामान सही कीमत पर मिल सके।
सरकार को मिलती हैं व्यापक शक्तियां
इस कानून के सेक्शन 3 के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, सप्लाई और वितरण को नियंत्रित कर सके। सरकार जरूरत पड़ने पर स्टॉक लिमिट तय कर सकती है, व्यापार को रेगुलेट कर सकती है और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठा सकती है। इससे बाजार में अनावश्यक महंगाई और जमाखोरी को रोकने में मदद मिलती है।
राज्यों को भी मिल सकती है जिम्मेदारी
इस अधिनियम के सेक्शन 5 के अनुसार, केंद्र सरकार अपनी शक्तियों को राज्य सरकारों या अधिकृत अधिकारियों को सौंप सकती है। इससे कानून को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू करना आसान हो जाता है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सकती है।
LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच सरकार ने रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है। वर्तमान आदेश में घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत घरेलू LPG, PNG, CNG और उर्वरक उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली गैस की सप्लाई को प्राथमिकता देने का फैसला किया गया है, ताकि आम लोगों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

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