पहले हो चुका है विरोध
दरअसल, प्रदेश सरकार काफी समय से शिक्षकों की उपस्थिति को डिजिटल माध्यम से दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। लगभग दो वर्ष पहले जब ऑनलाइन हाजिरी लागू की गई थी, तब शिक्षकों के बीच इसका व्यापक विरोध हुआ था। कई शिक्षक संगठनों ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए आंदोलन किया, जिसके चलते सरकार को उस समय यह निर्णय वापस लेना पड़ा था। बाद में यह मामला न्यायालय तक भी पहुंचा।
हाई कोर्ट के निर्देश
मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने सरकार से कहा था कि स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके बाद सरकार ने सभी पक्षों से विचार-विमर्श के लिए 12 सदस्यीय समिति का गठन किया, जिसमें शिक्षक प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया। समिति ने कई सुझाव दिए, जिनके आधार पर नई व्यवस्था तैयार की गई है।
नई व्यवस्था में क्या बदला
नए शासनादेश के अनुसार अब स्कूल खुलने के बाद एक घंटे के भीतर शिक्षकों को अपनी और विद्यार्थियों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। पहले यह समय सीमा केवल 15 मिनट थी, जिसे शिक्षक कठिन मानते थे। इसके अलावा यदि किसी स्कूल के प्रधानाध्यापक तकनीकी या अन्य कारणों से उपस्थिति दर्ज करने में असमर्थ होते हैं, तो उनकी जगह किसी अन्य शिक्षक को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकेगी।
कार्रवाई से पहले मिलेगा नोटिस
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी शिक्षक के खिलाफ उपस्थिति से जुड़े मामले में सीधे कार्रवाई नहीं की जाएगी। पहले संबंधित शिक्षक को नोटिस दिया जाएगा और उसका पक्ष सुना जाएगा। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
तकनीकी व्यवस्था को किया जाएगा मजबूत
नई प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए महानिदेशक स्कूल शिक्षा की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति गठित की जाएगी। यह समिति माध्यमिक शिक्षा विभाग के डिजिटल प्लेटफॉर्म का अध्ययन कर उसी तरह की व्यवस्था बेसिक शिक्षा में भी लागू करने की दिशा में काम करेगी।

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