जंग में फेल हो रहे चीनी हथियार, भारत का सिस्टम बना अभेद्य शील्ड

नई दिल्ली। दुनिया में चीन को लंबे समय से एक उभरती सैन्य ताकत के रूप में देखा जाता रहा है। कम लागत में बड़े पैमाने पर हथियार बनाने की उसकी क्षमता ने कई देशों को आकर्षित भी किया। लेकिन हाल के वर्षों, खासकर 2025 और 2026 की शुरुआत में सामने आई घटनाओं ने चीनी हथियारों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई युद्ध और संघर्ष क्षेत्रों में इन सिस्टम्स का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।

कई देशों में दिखी तकनीकी कमजोरी

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में तैनात चीनी एयर डिफेंस सिस्टम हमलों को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं रहे। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के सामने इनके रडार कमजोर पड़ गए, जिससे कई अहम ठिकाने सुरक्षित नहीं रह सके।

इसी तरह वेनेजुएला में भी चीनी रडार और एयर डिफेंस सिस्टम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए। इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के कारण सिस्टम की क्षमता काफी सीमित हो गई।

दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के पास मौजूद चीनी एयर डिफेंस सिस्टम भी चर्चा में रहे। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे हमलों को प्रभावी ढंग से रोकने में संघर्ष करते दिखे, जिससे उनकी क्षमता पर सवाल उठे।

वहीं दक्षिण-पूर्व एशिया में कंबोडिया के सैनिकों द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ चीनी हथियारों में लगातार फायरिंग के दौरान तकनीकी खराबियां सामने आईं जैसे ओवरहीटिंग और जाम होना। जिसके कारण चीनी हथियारों के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे

क्या हैं इन कमजोरियों के कारण?

विशेषज्ञ मानते हैं कि इन समस्याओं के पीछे कई कारण हो सकते हैं। चीन की कई सिस्टम विदेशी तकनीकों से प्रेरित हैं, लेकिन उनकी पूरी तरह विश्वसनीय कॉपी तैयार करना चुनौतीपूर्ण होता है। आधुनिक युद्ध में सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम की भूमिका बेहद अहम होती है, जहां छोटी सी कमी भी बड़ा अंतर पैदा कर सकती है। 

वहीं, चीन को बड़े पैमाने पर वास्तविक युद्ध का सीमित अनुभव रहा है, जिससे उसके हथियारों की फील्ड टेस्टिंग सीमित मानी जाती है। कुछ रिपोर्टों में गुणवत्ता नियंत्रण और रक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता की कमी को भी एक कारण बताया गया है।

भारत का सिस्टम अभेद्य शील्ड

दूसरी ओर, भारत ने अपनी रक्षा रणनीति में संतुलित और बहु-स्तरीय दृष्टिकोण अपनाया है। भारत का एयर डिफेंस नेटवर्क विभिन्न तकनीकों का संयोजन है, जिसमें स्वदेशी, रूसी और इजरायली सिस्टम शामिल हैं। इस मल्टीलेयर सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अगर एक प्रणाली किसी कारण से विफल हो जाए, तो दूसरी तुरंत सक्रिय होकर सुरक्षा सुनिश्चित करती है। यही वजह है कि भारत की रक्षा व्यवस्था को अधिक विश्वसनीय और प्रभावी माना जा रहा है।

वैश्विक रिपोर्ट क्या कहती है?

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के अनुसार, चीन दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक है और 2021 से 2025 के बीच उसकी वैश्विक हिस्सेदारी करीब 5.8% रही है। इसके बावजूद हालिया घटनाओं ने यह संकेत दिया है कि केवल उत्पादन और कीमत ही नहीं, बल्कि प्रदर्शन और भरोसेमंद तकनीक भी उतनी ही जरूरी है।

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