अमेरिका का तेल कौन ले रहा? टॉप खरीदारों की लिस्ट में भारत-चीन

नई दिल्ली। दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। ईरान से जुड़े तनाव और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के कारण सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ा है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मांदेब जैसे अहम समुद्री मार्गों पर खतरे के कारण तेल की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

अमेरिका बना तेल बाजार का सबसे बड़ा खिलाड़ी

इस संकट के बीच अमेरिका को बड़ा फायदा मिल रहा है। वह आज दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल उत्पादक बन चुका है और कई देशों को बड़े पैमाने पर निर्यात कर रहा है। शेल ऑयल क्रांति के बाद से अमेरिका ने अपनी ऊर्जा नीति में जबरदस्त बदलाव किया है और अब वह आयातक से निर्यातक बन चुका है।

कौन-कौन हैं सबसे बड़े खरीदार?

अमेरिका से तेल खरीदने वाले देशों की सूची में यूरोप, एशिया और उत्तरी अमेरिका के कई बड़े नाम शामिल हैं:

नीदरलैंड – 419 मिलियन बैरल (सबसे बड़ा खरीदार)

मेक्सिको – 398 मिलियन बैरल

कनाडा – 324 मिलियन बैरल

दक्षिण कोरिया – 257 मिलियन बैरल

जापान – 247 मिलियन बैरल

चीन – 238 मिलियन बैरल

भारत – 221 मिलियन बैरल

यूके – 124 मिलियन बैरल

स्पेन – 95 मिलियन बैरल

इस सूची में भारत का शामिल होना यह दिखाता है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अब स्रोतों में विविधता ला रहा है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह स्थिति?

भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण भी है। एक तरफ कीमतें बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सप्लाई का संकट भी गहरा सकता है। ऐसे में भारत को संतुलन बनाते हुए अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की रणनीति अपनानी पड़ रही है।

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