नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाल ही में दलहन (तूर, उड़द और मसूर) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, जिसने किसानों के बीच उम्मीद और बहस दोनों को जन्म दिया है। सरकार ने इन दालों की 100% न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद का ऐलान किया है, लेकिन इसके साथ जोड़ा गया एक शब्द इच्छुक पूरे मुद्दे को चर्चा का केंद्र बना रहा है।
MSP पर 100% खरीद: राहत या शर्तों वाला वादा?
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की कि सरकार तूर, उड़द और मसूर की पूरी खरीद MSP पर करेगी। यह फैसला किसानों के लिए राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ती है।
हालांकि, इच्छुक शब्द ने इस घोषणा को विवादों में ला दिया है। किसान संगठनों का कहना है कि गेहूं और धान की खरीद में ऐसी कोई शर्त नहीं होती किसान अपनी उपज लाता है और सरकार उसे खरीद लेती है। ऐसे में दलहन के लिए यह अलग व्यवस्था क्यों?
आयात पर निर्भरता: सरकार की बड़ी चिंता
सरकार का यह कदम सिर्फ किसानों की आय बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी है। खाद्य तेल में भारत लगभग 55% तक आयात पर निर्भर है। दलहन में आयात निर्भरता तेजी से बढ़कर 21% तक पहुंच चुकी है। ऐसे में सरकार चाहती है कि देश के अंदर ही उत्पादन बढ़े, ताकि विदेशी निर्भरता कम हो सके।
बीज और उत्पादन बढ़ाने की रणनीति
दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने बीजों पर खास ध्यान दिया है। अलग-अलग फसलों के लिए वित्तीय सहायता तय की गई है:
अरहर (तूर): ₹4,500 प्रति क्विंटल
उड़द: ₹2,000 प्रति क्विंटल
चना: ₹1,800 प्रति क्विंटल
इसके साथ ही राज्यों को सब्सिडी वाले बीज वितरित करने के लक्ष्य भी दिए गए हैं, जिससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता के बीज मिल सकें।

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