क्या है पूरा मामला
बताया जा रहा है कि प्रदेश में लाखों उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटरों को उनकी सहमति के बिना प्रीपेड प्रणाली में बदल दिया गया। इस कदम से कई उपभोक्ताओं को असुविधा का सामना करना पड़ा, क्योंकि प्रीपेड व्यवस्था में पहले से भुगतान करना जरूरी होता है। इस मुद्दे को लेकर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में याचिका दाखिल की है। परिषद का कहना है कि यह कदम उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है और इसे तत्काल सुधारा जाना चाहिए।
मिलेगा विकल्प का अधिकार
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, बिजली उपभोक्ताओं को यह अधिकार है कि वे अपने मीटर के लिए प्रीपेड या पोस्टपेड मोड में से किसी एक का चयन स्वयं करें। केंद्र स्तर पर भी इस बात को स्पष्ट किया जा चुका है कि स्मार्ट मीटर जरूरी हो सकते हैं, लेकिन भुगतान का तरीका चुनना उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर करता है।
पोस्टपेड में बदलाव की मांग तेज
उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि जिन उपभोक्ताओं के मीटर बिना सहमति के प्रीपेड में बदले गए हैं, उन्हें तुरंत पोस्टपेड मोड में वापस किया जाए। परिषद का मानना है कि यह कदम उपभोक्ताओं को राहत देगा और उनकी परेशानियों को कम करेगा।
इस सन्दर्भ में आयोग ने मांगा जवाब
मामले की गंभीरता को देखते हुए नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों और पावर कॉरपोरेशन से जवाब तलब किया है। संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है। इससे साफ है कि अब इस मुद्दे पर सख्ती से सुनवाई होगी।

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