बिहार में शिक्षकों पर सख्ती: वेतन कटौती की तैयारी

अररिया: बिहार के शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन उपस्थिति की समीक्षा में जिले के कई शिक्षकों की उपस्थिति में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने जवाब तलब करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि दोषी पाए जाने पर नो वर्क, नो पे के तहत वेतन कटौती की जाएगी।

45 शिक्षकों की उपस्थिति में गड़बड़ी

मार्च माह की समीक्षा में अररिया जिले के सभी नौ प्रखंडों को मिलाकर कुल 45 शिक्षकों की उपस्थिति संदिग्ध पाई गई है। कई मामलों में शिक्षक लंबे समय तक अनुपस्थित रहे, जबकि कुछ ने समय पर लॉगिन या लॉगआउट नहीं किया। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) राशिद नवाज ने इन सभी शिक्षकों को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।

देर से स्कूल पहुंचने के मामले बढ़ें

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ शिक्षक नियमित रूप से देर से विद्यालय पहुंचे। एक शिक्षक तो पूरे 21 दिन सुबह 10 बजे के बाद विद्यालय पहुंचे। इसके अलावा कई शिक्षकों ने 15 से 21 दिनों तक अनुपस्थिति दर्ज कराई, लॉगआउट का समय दर्ज नहीं किया, उपस्थिति के लिए जरूरी फोटो अपलोड नहीं किया। यह सभी बातें ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों से स्पष्ट हुई हैं।

'नो वर्क, नो पे' लागू करने की चेतावनी

शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि जांच में अनुपस्थिति या लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित अवधि का वेतन काट लिया जाएगा। यह कार्रवाई “नो वर्क, नो पे” नियम के तहत की जाएगी, जिससे शिक्षकों में अनुशासन सुनिश्चित किया जा सके।

शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता असर

जानकारों का मानना है कि शिक्षकों की ऐसी लापरवाही का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ता है। नियमित उपस्थिति और समय पर कक्षाएं न होने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को लागू किया है, ताकि हर शिक्षक की उपस्थिति और कार्यप्रणाली पर नजर रखी जा सके।

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