बंगाल की 50 सीटों पर ‘बिहारी दांव’: BJP, TMC और कांग्रेस में सियासी जंग तेज

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इस बार कई मायनों में अलग और दिलचस्प होता दिख रहा है। जहां एक ओर 294 सीटों पर राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं, वहीं करीब 50 ऐसी सीमावर्ती सीटें हैं, जहां मुकाबला 'बिहारी बनाम बिहारी' का रूप ले चुका है। इन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस तीनों ही दलों ने खास रणनीति के तहत बिहार के नेताओं को मैदान में उतार दिया है।

सीमावर्ती सीटों पर खास नजर

बिहार से सटे पश्चिम बंगाल के मालदा, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मुर्शिदाबाद और बीरभूम जैसे जिलों की लगभग 50 विधानसभा सीटें इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। इन इलाकों में हिंदी भाषी और बिहार मूल के मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है, जो चुनावी समीकरण को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इसी कारण सभी प्रमुख दल इन सीटों पर विशेष फोकस कर रहे हैं।

हिंदी भाषी वोट बैंक को साधने की रणनीति

इन क्षेत्रों में रहने वाले मतदाताओं में पासवान, यादव, कुशवाहा और अति पिछड़े वर्ग के लोग बड़ी संख्या में मौजूद हैं। राजनीतिक दल इन्हीं समुदायों को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। यहां बिहार के नेताओं को प्रचार में उतारने का मकसद साफ है स्थानीय भाषा और सामाजिक समीकरणों के जरिए मतदाताओं से सीधा जुड़ाव बनाना।

बंगाल के इन सीटों पर बीजेपी की आक्रामक रणनीति

बीजेपी ने इन 50 सीटों को जीतने के लिए व्यापक अभियान छेड़ दिया है। पार्टी ने बिहार के करीब 150 नेताओं की टीम को इन इलाकों में उतारा है। इसमें सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय और दिलीप जायसवाल जैसे नेता लगातार दौरे कर रहे हैं। रोड शो और जनसभाओं के जरिए पार्टी माहौल बनाने में जुटी है।

बंगाल के इन सीटों के लिए टीएमसी का भी जवाबी दांव तेज

ममता बनर्जी की पार्टी ने भी इस चुनौती को गंभीरता से लिया है। तृणमूल कांग्रेस ने शत्रुघ्न सिन्हा और कीर्ति आजाद जैसे चर्चित चेहरों को प्रचार में उतारा है। इन नेताओं की लोकप्रियता और बिहार से जुड़ाव को देखते हुए टीएमसी को उनसे काफी उम्मीदें हैं। साथ ही तेजस्वी यादव के भी इन क्षेत्रों में प्रचार करने की संभावना जताई जा रही है।

बंगाल के इन सीटों पर जीत के लिए कांग्रेस भी पीछे नहीं रहने वाली

कांग्रेस ने भी सीमावर्ती इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बिहार से जुड़े नेताओं को जिम्मेदारी दी है। पार्टी ने किशनगंज के सांसद मोहम्मद जावेद को इन क्षेत्रों में प्रचार का जिम्मा सौंपा है। कांग्रेस की कोशिश है कि पारंपरिक वोट बैंक को फिर से अपने पक्ष में किया जाए।

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