यूपी में इन शिक्षकों की दोबारा होगी जांच, विभाग ने दिए सख्त निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़े मामलों को गंभीरता से लेते हुए एक अहम फैसला लिया है। विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की दोबारा जांच कराई जाए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

क्यों हो रही है दोबारा जांच?

हालांकि विभाग का कहना है कि फिलहाल कोई भी शिक्षक फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर कार्यरत नहीं है, लेकिन फिर भी सतर्कता के तौर पर यह कदम उठाया गया है। कई जिलों ने फर्जी शिक्षकों की संख्या शून्य बताई है, जिस पर विभाग ने विशेष ध्यान देते हुए विस्तृत और सत्यापित रिपोर्ट मांगी है।

अधिकारियों को सख्त निर्देश

हाल ही में हुई वर्चुअल बैठक में मंडलीय और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि जांच प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और गंभीरता के साथ पूरा किया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अन्य योजनाओं की भी समीक्षा

इस बैठक में सिर्फ जांच ही नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग की कई महत्वपूर्ण योजनाओं और कार्यों की भी समीक्षा की गई। इनमें विद्यांजलि पोर्टल की प्रगति, डीबीटी योजनाएं, आरटीई के तहत दाखिले, आईजीआरएस पर लंबित शिकायतें और न्यायालय से जुड़े मामलों पर चर्चा शामिल रही।

आरटीई और मान्यता पर जोर

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि आरटीई के तहत जिन बच्चों को स्कूलों में सीटें आवंटित हो चुकी हैं, उनका शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, स्कूलों की नई मान्यता से जुड़े मामलों का हर महीने समय पर निपटान करने को कहा गया।

स्कूल चलो अभियान और लंबित भुगतान

बैठक में “स्कूल चलो अभियान” की प्रगति पर भी ध्यान दिया गया और इसे और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों के लंबित भुगतान को जल्द से जल्द निपटाने पर भी जोर दिया गया।

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