बिहार में अब इस जमीन का भी होगा सर्वे, तैयारी शुरू

पटना। बिहार सरकार ने राज्य में असर्वेक्षित और विवादित जमीन यानी टोपोलैंड को लेकर ठोस नीति बनाने की तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत अब टोपोलैंड का व्यापक सर्वे कराया जाएगा। डिप्टी सीएम एवं राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय सिन्हा ने सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेट (DM) को इस संबंध में रिपोर्ट देने का निर्देश दे दिया है।

टोपोलैंड क्या है?

बता दें की टोपोलैंड वह जमीन होती है, जो बिहार में नदियों के मार्ग बदलने या पुराने सर्वे (1905-1915) में शामिल न होने के कारण असर्वेक्षित मानी जाती है। यह मुख्यतः सरकारी जमीन मानी जाती है, लेकिन इस पर लंबे समय से स्वामित्व और उपयोग को लेकर विवाद चलते आ रहे हैं। अब सरकार इस जमीन का सर्वे कराकर विवाद सुलझाने और भूमि का व्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित करने की तैयारी में है।

विजय सिन्हा ने क्या कहा

डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने बताया कि विभाग का उद्देश्य जमीन संबंधी नियमों और कानूनों को व्यावहारिक, पारदर्शी और विवादरहित बनाना है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में तेजी और गहनता के साथ काम किया जा रहा है। सभी जिलों के डीएम को टोपोलैंड की वास्तविक स्थिति की जानकारी देने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

राजस्व विभाग की बैठक

जानकारी के अनुसार, 10 अप्रैल को राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाई गई है, जिसमें टोपोलैंड के सर्वे और उसकी पहचान पर चर्चा हो सकती है। प्रत्येक जिले की असर्वेक्षित और बकास्त भूमि की समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं। विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज ने डीएम को लेटर भेजकर जल्द ही टोपोलैंड की जानकारी उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

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