8th Pay Commission: पुरानी पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति को लेकर बड़ी खबर

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में हुई NC-JCM (नेशनल काउंसिल-ज्वॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी) की 49वीं बैठक के बाद पुरानी पेंशन योजना (OPS), अनुकंपा नियुक्ति और अन्य सेवा संबंधी मुद्दों पर नई उम्मीदें जगी हैं।

बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

इस बैठक में कर्मचारियों की कई प्रमुख मांगों पर विचार किया गया, जिनमें शामिल हैं: पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में ढील, प्रमोशन प्रक्रिया में सुधार, मेडिकल रीइम्बर्समेंट की सुविधा, अन्य लंबित सेवा संबंधी मांगें। कर्मचारी संगठनों ने इन मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया और इन्हें 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में शामिल करने की मांग की।

OPS को लेकर सबसे बड़ी चर्चा

बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लेकर हुई। कर्मचारी प्रतिनिधियों ने मांग की कि जिन भर्तियों का विज्ञापन 22 दिसंबर 2023 से पहले जारी हुआ था, उन कर्मचारियों को OPS का लाभ दिया जाए, भले ही उनकी नियुक्ति बाद में हुई हो। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी की वजह से कई कर्मचारी नई पेंशन योजना (NPS) में चले गए, जबकि यह उनकी गलती नहीं थी। इसी कारण उन्हें पुरानी पेंशन का लाभ मिलना चाहिए।

अनुकंपा नियुक्ति पर भी हुई चर्चा

बैठक में अनुकंपा नियुक्ति का मुद्दा भी प्रमुख रहा। कर्मचारी संगठनों ने मांग की कि जिन मामलों में कर्मचारी की मृत्यु 2003 या उससे पहले हुई थी और आवेदन समय पर किया गया था, उन परिवारों को भी पुरानी पेंशन योजना से जोड़ा जाए। यह मांग उन परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है, जो लंबे समय से सरकारी सहायता का इंतजार कर रहे हैं।

OPS और NPS का अंतर

भारत में 1 जनवरी 2004 के बाद पुरानी पेंशन योजना को बंद कर दिया गया था और उसकी जगह NPS लागू की गई।

OPS (Old Pension Scheme): इसमें रिटायरमेंट के बाद आखिरी वेतन का लगभग 50% पेंशन के रूप में मिलता है और यह आजीवन सुरक्षा देती है।

NPS (New Pension Scheme): इसमें पेंशन बाजार आधारित निवेश पर निर्भर करती है, जिससे रिटर्न तय नहीं होता और जोखिम भी बना रहता है।

8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीदें?

कर्मचारी संगठनों का मानना है कि NC-JCM की इस बैठक में हुई चर्चाओं का असर आने वाले 8वें वेतन आयोग पर भी पड़ सकता है। अगर सरकार इन मांगों पर सहमति देती है, तो लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और उनके परिवारों को बड़ा लाभ मिल सकता है।

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