योगी सरकार का मास्टरस्ट्रोक: गांव-गांव में शुरू होंगी नई सुविधाएं, लोगों को खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य को दुग्ध उत्पादन में देश का अग्रणी प्रदेश बनाने के लक्ष्य के साथ सरकार ने डेयरी सेक्टर में एक विशाल मास्टर प्लान लागू किया है। इस योजना का सबसे बड़ा फायदा गांवों में रहने वाले किसानों, महिलाओं और युवाओं को मिलने वाला है, जिन्हें अब रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे।

सरकार की इस नई रणनीति को 'ऑपरेशन-4' नाम दिया गया है। इसके तहत चार बड़ी योजनाओं को एक साथ जमीन पर उतारा गया है, ताकि पशुपालन और डेयरी व्यवसाय को गांव-गांव तक पहुंचाया जा सके। इन योजनाओं में मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना, मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना, नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना और मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना शामिल हैं।

50 फीसदी तक सब्सिडी से किसानों को बड़ी राहत

योगी सरकार ने इस योजना को इस तरह तैयार किया है कि छोटे और मध्यम किसान भी आसानी से डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकें। सरकार डेयरी यूनिट लगाने पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। योजना के तहत केवल 15 फीसदी राशि लाभार्थी को लगानी होगी, जबकि 35 फीसदी बैंक ऋण और बाकी 50 फीसदी हिस्सा सरकार अनुदान के रूप में देगी। इस मॉडल के जरिए किसान 2 गाय से लेकर 25 गाय तक की डेयरी इकाई स्थापित कर सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

दो गायों पर 80 हजार तक की सहायता

मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना के तहत छोटे पशुपालकों को विशेष लाभ दिया जा रहा है। यदि कोई किसान दो गायों की डेयरी यूनिट शुरू करता है, तो उसे अधिकतम 80 हजार रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर किसान भी डेयरी व्यवसाय से जुड़ सकेंगे। इसके अलावा, अच्छी नस्ल की अधिक दूध देने वाली गाय पालने वाले पशुपालकों को सरकार प्रोत्साहन राशि भी दे रही है। मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना के तहत चयनित पशुपालकों को 10 हजार से 15 हजार रुपये तक नकद पुरस्कार दिया जा रहा है।

स्वदेशी नस्लों पर सरकार का विशेष जोर

योगी सरकार का फोकस गिर, साहीवाल और गंगातीरी जैसी स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर है। ये नस्लें अधिक दूध देने के साथ-साथ बेहतर गुणवत्ता के लिए भी जानी जाती हैं। सरकार का मानना है कि इन नस्लों के बढ़ने से दूध उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।

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