सरकार के इस फैसले से लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब लोगों को यह डर नहीं रहेगा कि बंटवारा नहीं होने की वजह से उनकी जमीन का सर्वे अटक जाएगा।
बिना बंटवारे वाले परिवारों को राहत
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी परिवार में जमीन का आपसी बंटवारा अभी तक नहीं हुआ है, तब भी सर्वे की प्रक्रिया जारी रहेगी। ऐसी स्थिति में जमीन उसी पूर्वज या पुराने मालिक के नाम पर दर्ज रहेगी, जिसके नाम से पहले से सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध है। इस फैसले से उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है जहां वर्षों से जमीन का बंटवारा लंबित है। सरकार का कहना है कि सर्वे का उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करना है, न कि पारिवारिक विवादों में देरी के कारण पूरी प्रक्रिया रोकना।
लंबित मामलों को निपटाने के लिए बढ़ेगी निगरानी
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने निर्देश दिया है कि जहां जरूरत होगी वहां अतिरिक्त अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। हाल के दिनों में कई जगहों पर हड़ताल और कामकाज प्रभावित होने के कारण सर्वे से जुड़े कई मामले लंबित हो गए थे। अब इन मामलों को तेजी से निपटाने के लिए राजस्व कर्मचारियों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई जाएगी।
सरकारी जमीन की पहचान में होगी नई तकनीक का इस्तेमाल
राज्य सरकार अब जमीन सर्वे में आधुनिक तकनीक का भी सहारा लेने जा रही है। सरकारी जमीन की सही पहचान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े को रोकने में मदद मिलेगी। नई तकनीक के जरिए सर्वे को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की तैयारी की जा रही है, ताकि भविष्य में रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याएं कम हों।
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